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Sunday, June 20, 2021

इस भारतीय क्रिकेटर ने टेस्ट क्रिकेट में जड़ा था ऐसा छक्का, दूसरे शहर में जाकर गिरी थी गेंद, पढ़िए दिलचस्प किस्सा

  


विश्व क्रिकेट ऐसे कई बेहतरीन रिकॉर्ड से भरा हुआ है जिनके बारे में सुनते ही लगता है कि आखिर इन्हें खिलाड़ियों ने बनाया कैसे होगा। इन रिकॉर्ड्स को क्रिकेट के हैरतअंगेज रिकॉर्ड कहें तो कोई बुराई नहीं होगी। क्रिकेट मैच के दौरान अक्सर ही जहां बल्लेबाजों द्वारा चौके और छक्कों की बारिश देखने को मिलती है। वहीं गेंदबाज अपनी शानदार गेंदबाजी के दम पर विकेट चटकाने का प्रयास करते रहते है।

ऐसे में कई बार कुछ ऐसे रिकॉर्ड बन जाते हैं जिनके बारे में कल्पना करना भी मुश्किल होता है। ऐसा ही एक रिकॉर्ड कई दशक पहले टेस्ट क्रिकेट में बना था। इसे बनाने वाला कोई और नहीं बल्कि पूर्व महान भारतीय खिलाड़ी है। जिनके नाम पर आज चर्चित अवार्ड से बेहतरीन क्रिकेटरों को सम्मानित भी किया जाता है। हम बात कर रहे हैं, पूर्व भारतीय कप्तान कर्नल सी.के. नायडू की।

कर्नल सी.के. नायडू ने टेस्ट क्रिकेट में भारत की ओर से कप्तानी करते हुए एक ऐसा छक्का जड़ा था, कि गेंद एक शहर को पार करते हुए दूसरे शहर में जा गिरी थी। यह छक्का उन्होंने भारत और इंग्लैंड के बीच वारविकशायर में खेले गए एक टेस्ट मैच के दौरान लगाया था। कप्तान नायडू ने अपने टेस्ट करियर में केवल एक ही छक्का जड़ा था और उसमें भी उन्होंने गेंद को मैदान के बाहर न पहुंचाकर सीधे दूसरे शहर में पहुंचा दिया था।

दरअसल कप्तान नायडू ने इस मैच के दौरान जिस गेंद पर छक्का जड़ा था, वह नदी को पार करते हुए व्रस्टशेयर शहर में जा गिरा था। यह नदी वरविकशायर और व्रस्टशेयर को अलग करती है। गौरतलब हो कि कर्नल सी.के. नायडू का जन्म 13 अक्टूबर 1895 को महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ था। उन्होंने अपने क्रिकेट करियर में कुल 7 टेस्ट मैच ही खेले। जिसकी 14 पारियों में उन्होंने शानदार 350 रन बनाए। इनमें दो अर्धशतक भी शामिल हैं। बल्लेबाज़ी के साथ ही कर्नल नायडू ने गेंदबाजी में भी अपना हाथ आजमाया और 9 विकेट भी अपने नाम किए।

कर्नल नायडू की एक अन्य बात भी उन्हें आज के युवा क्रिकेटरों से बिल्कुल अलग बनाती है। दरअसल उनकी फिटनेस ऐसी थी कि उन्होंने 68 साल की उम्र तक इस खेल में अपना प्रदर्शन किया। वहीं आज कल के क्रिकेटर 37-38 साल की उम्र पूरी करते ही जवाब दे जाते हैं। नायडू ने भारत के पहले टेस्ट मैच में टीम का नेतृत्व किया था। उन्होंने सन 1932 में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए टेस्ट मैच में भारतीय टीम की कप्तानी की थी।

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