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Saturday, June 5, 2021

5 बदनसीब क्रिकेटर जिन्हें नहीं मिला भारत के लिए खेलने का मौका

  


एक अरब की आबादी वाले देश भारत ने क्रिकेट जगत को कई महान खिलाड़ी दिए हैं, जिन्होंने अपने प्रदर्शन से क्रिकेट को काफी उंचाई दी हैं. इसके आलावा ऐसे भी कई खिलाड़ी रहे हैं, जिनमे प्रतिभा की कभी कोई कमी नहीं रही लेकिन वह सिर्फ एक मौके का इंतजार कर रह गए.

आज इस लेख में हम 5 ऐसे बदनसीब क्रिकेटरों के बारे में जानेगे, जिन्हें कभी भी भारत के लिए खेलने का मौका नहीं मिल पाया.

5) सितांशु कोटक

90 के दशक में सितांशु कोटक एक होनहार और स्टाइलिश रणजी ट्रॉफी बल्लेबाज थे. सौराष्ट्र के दिग्गज ने घरेलू स्तर पर अपने प्रदर्शन से सभी का दिल जीता लेकिन दुर्भाग्यवश उन्हें कभी भारत के लिए खेलने का न्योता नहीं मिला.

कोटक में 130 प्रथम श्रेणी मैचों में 41.76 की औसत 8061 रन बनाये, इस दौरान उन्होंने 15 शतक और 55 अर्द्धशतक भी लगायें.

4) मिथुन मन्हास

मिथुन मन्हास एक दशक से अधिक समय से दिल्ली रणजी टीम के लिए मुख्य खिलाडी रहे थे. वह दिल्ली टीम के कप्तान थे जिसने 2008 में रणजी ट्रॉफी जीती थी लेकिन सेमीफाइनल और फाइनल में गौतम गंभीर ने टीम का नेतृत्व किया था.

दिल्ली के पूर्व कप्तान ने रणजी ट्रॉफी में 8554 रन बनाए जो कि इतिहास में चौथा सबसे ज्यादा हैं. वह सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण और सौरव गांगुली के दौर में पैदा हुआ थे. इस कड़ी प्रतिस्पर्धा का मतलब था कि उन्हें कभी भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिला.

3) पद्मकर शैवालकर

मुंबई रणजी ट्रॉफी के इतिहास में सबसे सफल टीम है क्योंकि उन्होंने 41 बार ट्रॉफी जीती हैं. यदि आप किसी टीम के लिए 27 सीज़न के खेलना चाहते हैं, तो आपको अच्छा होना चाहिए और शिवलकर बहुत अच्छे थे, उन्होंने मुंबई के लिए 27 रणजी ट्रॉफी सीजन खेले.

शैवालकर ने 124 प्रथम श्रेणी मैचों में 19.69 की औसत से 589 विकेट लिए लेकिन उन्हें कभी भारत के लिए खेलने का मौका नहीं मिल पाया.

2) अमोल मजूमदार

बहुत कम लोग फैन्स जानते हैं कि अमोल मजूमदार उस समय अगले बल्लेबाज थे जब सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली ने हैरिस शील्ड ट्रॉफी में 661 रन की साझेदारी की थी. मजूमदार के लिए दुःख की बात है कि यह आने वाली चीजों का संकेत था क्योंकि उन्हें भारत के कॉल-अप की प्रतीक्षा करनी पड़ेगी.

दाएं हाथ के खिलाड़ी ने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया लेकिन उन्हें ‘फैब फोर’ के कारण कभी मौका नहीं मिला. मजूमदार जिन्होंने 171 मैचों में 30 प्रथम श्रेणी शतको सहित 11,671 रन बनाए, लेकिन उन्हें भारत के लिए खेलने कभी मौका नहीं मिला.

1) रजिंदर गोयल

यदि राजिंदर गोयल का जन्म किसी अन्य युग में हुआ था, तो वे निश्चित रूप से भारत के लिए खेले होते, लेकिन वह भारत के स्पिन चौकड़ी के युग में पैदा हुआ जोकि उनके करियर में रोड़ा बनी.

दाएं हाथ के स्पिनर रजिंदर गोयल ने 157 प्रथम श्रेणी मैचों में 18.58 की औसत से 750 विकेट हासिल किये. लेकिन उन्हें कभी भारत के लिए खेलने का मौका नहीं मिल पाया.

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