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Friday, May 21, 2021

ग्रेग चैपल ने उगला जहर, सौरव गांगुली नहीं चाहते थे सुधार, सिर्फ कप्तानी से मतलब

 


टीम इंडिया के पूर्व कोच ग्रेग चैपल अपने विवादित बयानों को लेकर अकसर सुर्खियों में रहते हैं, उन्होने टीम इंडिया के महानतम कप्तानों में से एक सौरव गांगुली को मतलबी बताया है, ग्रेग चैपल का मानना है कि सौरव गांगुली टीम में सुधार नहीं चाहते थे, वो किसी तरह टीम का कप्तान बने रहना चाहते थे, चैपल ने ये भी कहा कि गांगुली की बदौलत उन्हें कोच बनाया गया था, बाद में गांगुली की वापसी के कारण ही पद छोड़ना पड़ा।

गांगुली के कारण मौका
क्रिकेट लाइफ स्टोरी पॉडकास्ट में चैपल ने कहा, सौरव गांगुली ही थे, जिन्होने मुझसे भारत को कोचिंग देने के लिये संपर्क किया था, मेरे पास दूसरे काम थे, लेकिन मैंने फैसला लिया, चूंकि जॉन बुकानन ऑस्ट्रेलिया को कोचिंग दे रहे थे, मैं दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाले और क्रिकेट प्रेमी देश को कोचिंग देना पसंद करुंगा। वो मौका सौरव गांगुली के कारण मिला, चैपल 2005 से 2007 तक टीम इंडिया के कोच थे, उनकी कोचिंग में टीम इंडिया 2007 विश्वकप के पहले राउंड से ही बाहर हो गई थी, टीम बांग्लादेश से भी हार गई थी।

चुनौतीपूर्ण थे
चैपल ने कहा भारत में 2 साल हर मोर्चे पर चुनौतीपूर्ण थे, उम्मीदें हास्यास्पद थी, कुछ मुद्दे सौरव के कप्तान होने को लेकर थे, वो विशेष रुप से कड़ी मेहनत नहीं करना चाहते थे, वो अपनी क्रिकेट में सुधार नहीं करना चाहते थे, वो सिर्फ कप्तान के रुप में टीम में रहना चाहते थे, ताकि वो चीजों को नियंत्रित कर सके, मैं टीम के भीतर कुछ संस्कृतियों और सोचने के तरीकों को बदलना चाहता था, चीजें खराब होने से पहले भारतीय टीम ने राहुल द्रविड़ के नेतृत्व में लगभग एक साल तक शानदार प्रदर्शन किया था।

द्रविड़ के लिये क्या कहा
चैपल ने कहा राहुल द्रविड़ वास्तव में भारत को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम बनाने में लगे थे, दुख की बात ये है कि टीम में सभी की भावना एक जैसी नहीं थी, इसके बजाय टीम में रहने पर ध्यान केन्द्रित करेंगे, कुछ सीनियर खिलाड़ियों ने विरोध किया, क्योंकि उनमें से कुछ अपने करियर के अंत में थे, जब गांगुली को टीम से बाहर किया गया, तो खिलाड़ियों को लगने लगा कि अगर वो टीम से बाहर हो सकते हैं, तो कोई भी हो सकता है। चैपल ने कहा कि हमारे 12 महीने बहुत अच्छे थे, लेकिन फिर प्रतिरोध बहुत अधिक हो गया, गांगुली टीम में वापस लौटे, खिलाड़ियों का संदेश स्पष्ट था, हम बदलाव नहीं चाहते, भले ही बोर्ड ने मुझे एक नया अनुबंध दिया था, लेकिन मैंने फैसला किया, कि मुझे इस तरह के तनाव की आवश्यकता नहीं है, गांगुली ने चैपल के जाने के एक साल बाद 2008 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया था।

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