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Sunday, May 9, 2021

इलाज कम और बिल ज्यादा बना रहे एलोपैथी से जुड़े अस्पताल, बाबा रामदेव का बड़ा दावा, 27 लाख करोड़

 


योगगुरु बाबा रामदेव कोरोना की दवा को लेकर किये गये दावों की वजह से एक बार फिर विवादों में हैं, दरअसल एक टीवी चैनल में सवाल-जवाब के दौरान रामदेव ने पतंजलि आयुर्वेद की ओर से लांच की गई दवा को कोरोना का इलाज तक बता दिया, इतना ही नहीं उन्होने एलोपैथी से जुड़ी मेडिकल इंडस्ट्री पर जबरदस्त हमले किये।


एंकर ने क्या पूछा
एबीपी न्यूज के शो में एंकर रुबिका लियाकत ने पूछा था, कि शुरुआत में जब कोरोनिल आई , तो उसे लेकर बड़े विवाद पैदा हुए, आपने कहा, इससे कोरोना ठीक हो जाएगा, लेकिन सरकार तथा स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से कह दिया गया कि हमने कोई हरी झंडी नहीं दी है, क्या इस मामलसे में आपने सारी फॉर्मेलिटी पूरी कर ली है, अगर आप किसी मेडिकल साइंस को मानने वाले अस्पताल में जाएंगे जो अंग्रेजी दवाओं को लेकर आगे बढते हैं, वो आपकी बात से इत्तेफाक नहीं रखेंगे।

हमने दवा की क्षमता साइंटिफिकली साबित किया
एंकर के इस सवाल पर रामदेव ने दावा करते हुए कहा, हुआ क्या अंततः पूरी दुनिया को मानना पड़ा, कि हमने पूरा क्लिनिकली ट्रायल के रिसर्च और एविडेंस बेस्ड जो मेडिसीन दी, तो दुनिया को पहली कोरोना की दवा के तौर पर किसे मान्यता मिली, मैं एक और विवादास्पद बात करता हूं, जो भी कोरोना प्रोटोकॉल के तहत कोविड मैनेजमेंट के लिये दवाएं दी जा रही है, कोई भी कोरोना की दवाई नहीं है, ये सब कोरोना के जो कॉम्प्लिकेशन हैं, उनके मैनेजमेंट की ट्रीटमेंट है, लेकिन हमने जो दवा बनाई है, वो कोरोना को ठीक करती है, इसे हमने साइंटिफिकली साबित कर दिया है।

इलाज कम, बिल ज्यादा
रामदेव ने आगे कहा, जब आकर के डॉ. हर्षवर्धन और गडकरी जी ने एंडोर्स किया, कि अब तो सरकार ने भी माना है, कि ये कोविड मैनेजमेंट में कारगर है, अब इससे ज्यादा क्या कहेंगे आप, अभी तीरथ सिंह रावत इसका उद्घाटन करके गये हैं। भारत का आयुष मंत्रालय कहता है कि देश में दोनों पैथियों को मिलकर के रोगियों की बेहतरी के लिये काम करना चाहिये, ये भारत सरकार की गाइडलाइंस है, लेकिन कर नहीं रहे हैं, क्योंकि जो एलोपैछी के चिकित्सालय हैं, उनमें सरकारी अस्पतालों को छोड़कर बाकी ट्रीटमेंट कम कर रहे हैं और बिल ज्यादा बना रहे हैं। रामदेव ने आरोप लगाते हुए कहा 27 लाख करोड़ का ड्रग इंडस्ट्री का जो खेल है, इसमें अस्पतालों में बिल ज्यादा बनाये जाता हैं, टेस्ट ज्यादा कराये जाते हैं, गैरजरुरी ऑपरेशन ज्यादा किये जाते हैं, गैर जरुरी ड्रग्स ज्यादा दिये जाते हैं, आप इसे विवादस्पद कहें तो कहें, लेकिन हकीकत से मुंह कैसे चुरा सकते हैं, इस 27 लाख करोड़ के कारोबार में उपचार कम कारोबार ज्यादा है।

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