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Wednesday, April 28, 2021

काम LG कर रहे, Oxygen के लिए PM मोदी हैं, नीतियां शाह देख रहे, और कानून कोर्ट देख रहा, दिल्ली का CM नींद में है


आज भारत कोरोना वायरस संक्रमण के चपेट में पूरी तरह से आ चुका है। इससे लड़ने के लिए भारत सरकार एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। इस महामारी से लड़ने के लिए राज्यों का साथ बहुत जरूरी है। ऐसे में दिल्ली सरकार केंद्र का साथ देने के बजाय उन पर बोझ बन गई है। कल सोमवार का दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया कि, कोरोना टेस्ट सेंटर बढ़ाया जाए। साथ ही में RT PCR  टेस्टिंग के इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के निर्देश भी दिए हैं।

दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेशों को हम उल्लेख इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि यह पहली बार नहीं जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को कोरोना से निपटने का आदेश दिया हो। बीते रविवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑक्सीजन की कमी को लेकर केजरीवाल सरकार से कहा कि “ आप क्या चाहते है ऑक्सीजन आपके दरवाजे पर दिया जाए।“  हम यह कह सकते हैं कि कोरोना संक्रमण को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय दिल्ली का कानून व्यवस्था संभाल रही है।

दिल्ली में बीते कुछ दिनों से कोरोना टेस्टिंग की मात्रा में भारी गिरावट आई है। उदाहरण के लिए आप कल (सोमवार) को ही देख लीजिए। कल दिल्ली में सिर्फ 57,000 कोरोना टेस्ट हुआ है। आज दिल्ली में पॉजिटिविटी रेट 35 प्रतिशत से ज्यादा है। कोरोना संक्रमण को नियंत्रण में रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग बहुत ज्यादा जरूरी है।

दिल्ली के अस्पतालों में जब ऑक्सीजन की कमी हो जाती है तो राज्य के मुख्यमंत्री इस समस्या का समाधान निकालने की बजाय सब कुछ प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और LG के ऊपर छोड़ देते हैं।

उदाहरण के लिए आप शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई मीटिंग को देख  लीजिए। मीटिंग में केजरीवाल ने कहा कि वह CM होकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। अगर ऑक्सीजन के संकट को दूर नहीं किया गया, तो दिल्ली में त्रासदी हो सकती है। अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री है और ऐसे विपदा से डटकर सामना करने के बजाय उन्होंने अपना हाथ खड़े कर लिए हैं।

दिल्ली में  कोरोना के मरीजों के लिए जब बेड की कमी होती है तो वह गृह मंत्री अमित शाह से गुहार लगाते हैं। नतीजतन, दिल्ली में ITBP ने 500 बेड वाला हॉस्पिटल दिल्ली सरकार को दिया है। पिछले साल भी कुछ ऐसा ही आलम था। बता दें कि ITBP गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है।

दिल्ली में जब कोई ठोस नीति का सवाल उठता है तो दिल्ली के LG को आगे आना पड़ता है। जैसे कि, अभी कुछ दिनों पहले जब दिल्ली में लॉकडाउन लगाया गया था। ऐसे में LG ने पूरे तरह से परस्थिति को गंभीरता से लेते हुए लॉकडाउन लगाने का आदेश दिया।

अगर हम सारे फैसले और घटनाक्रम पर गौर करे तो समझ आता है कि दिल्ली की जनता कोरोना वायरस संक्रमण से  मुख्यमंत्री के सहयोग के बिना लड़ रही है। भारत की राजधानी दिल्ली में अभी  त्रासदी नहीं आए है और इसका श्रेय भारत सरकार के तीन सिपाहियों को जाता है – प्रधान मंत्री, गृह मंत्री और दिल्ली के LG.

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