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Friday, April 16, 2021

जब मनोज तिवारी को जान बचाने के लिये गंजी-पायजामे में भागना पड़ा था, तुरंत छोड़ दी थी दिल्ली!

 

जब मनोज तिवारी को जान बचाने के लिये गंजी-पायजामे में भागना पड़ा था, तुरंत छोड़ दी थी दिल्ली!

योगगुरु स्वामी रामदेव ने जून 2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान में स्वदेशी तथा काला धन के मुद्दे पर अनशन किया था, उनका आंदोलन तमाम वजहों से चर्चा में रहा, खासकर आधी रात को पुलिसिया कार्रवाई और उसके बाद स्वामी रामदेव द्वारा वेष बदलकर आंदोलन स्थल से निकलने का प्रयास, हालांकि पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया था, इस आंदोलन का हिस्सा रहे तमाम लोगों ने बीजेपी नेता और भोजपुरी सुपरस्टार मनोज तिवारी भी शामिल थे, हालांकि तब उनका सियासत से वैसा वास्ता नहीं था।

चारों ओर धुंआ था, पुलिस चला रही थी डंडे
4 जून 2011 की उस रात मनोज तिवारी को भी दिल्ली पुलिस के डंडे झेलने पड़े थे, बाद में एक दोस्त की मदद से मनोज तिवारी बमुश्किल वहां से बाहर निकल पाये थे, और सीधे एयरपोर्ट पहुंचे थे, वहां से मुंबई और फिर गुजरात चले गये थे। बाबा रामदेव की जीवनी में इस घटना का जिक्र करते हुए लेखक संदीप देव ने मनोज तिवारी के हवाले से लिखा है, मैं उस रात मंच के पीछे सो रहा था, अचानक आंसू गैस के गोले से मेरी नींद खुली, मैं समझ नहीं पाया, कि आखिर हो क्या रहा है, रामलीला मैदान में भगदड़ मची थी, पुलिस डंडे भांज रही थी।

पजामा-गंजी में भागने लगे मनोज तिवारी
उन्होने आगे बताया, इसी बीच मंच पर एक गोला फटा, मैं तेजी से गेट की ओर भागा, मैं पजामा और गंजी में ही था, कुर्ता पहनने का समय नहीं मिला, इस बीच पुलिस ने मुझे पीछे से एक डंडा मारा, मैं पीछे मुड़ा कि शायद वो पहचान ले, लेकिन तब तक दो और डंडे पड़े, मैं भागने लगा और भागते-भागते ही जेब से मोबाइल निकालकर अपने एक दोस्त को फोन किया। मनोज तिवारी के अनुसार वो तब तक भागते रहे, जब तक रणजीत सिंह फ्लाइओवर पर नहीं पहुंच गये, इस बीच आधे घंटे में उनका दोस्त गाड़ी लेकर आया, वो सीधे एयरपोर्ट पहुंचे और पहली उड़ान से दिल्ली छोड़कर मुंबई पहुंच गये, मुंबई से सीधे गुजरात चले गये, जहां उनकी एक फिल्म की शूटिंग हो रही थी।

गुजरात पहुंच आचार्य बालकृष्ण को फोन
मनोज तिवारी के अनुसार उस दिन गुजरात की फ्लाइट में यही चर्चा थी कि दिल्ली पुलिस ने बाबा रामदेव को मारकर उनकी लाश गायब कर दी, गुजरात पहुंचने के बाद मैंने आचार्य बालकृष्अण को फोन मिलाया, तो उन्होने पूछा मनोज तुम ठीक हो, मैंने कहा हां, और स्वामी जी, आचार्य जी ने कहा हम सब सुरक्षित हैं और फोन कट गया।

कांग्रेस नेता ने दी थी धमकी
मनोज तिवारी के मुताबिक उसी दिन उनके पास कांग्रेस के एक बड़े नेता का फोन आया था, और लगभग धमकी भरे अंदाज में कहा था, तुम्हें आंदोलन में जाने का बहुत शौक है, मैंने कहा भाई साहब बस ऐसे ही चला गया था, उधर से जवाब मिला, ठीक है वैसे ही भुगतना भी, और फोन कट गया, इसके 10 दिन बाद इनकम टैक्स टीम ने मेरे बनारस के पते पर एक नोटिस भेजा, फिर 10-12 दिनों के बाद मुंबई के पते पर नोटिस आ गया।

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