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Saturday, April 17, 2021

कोरोना पर भारी पड़ी मां की ममता! नर्स से लेकर डॉक्टर की आंखों से भी छलके आंसू


कोरोना पर भारी पड़ी मां की ममता! नर्स से लेकर डॉक्टर की आंखों से भी छलके आंसू

 दरभंगा के डीएमसीएच में अपने 5 महीने के मासूम को सीने से चिपकाने वाली मां की ममता देख पूरा अस्‍पताल प्रशासन भावुक हो गया है । कोरोना नेगेटिव मां ने अपने कोरोना पॉजिटिव बच्‍चे को अस्‍पताल में भर्ती करने के बाद भी अकेले नहीं छोड़ा । मासूम की मां का ये त्‍याग देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं । हैरान करने वाली बात ये है कि बच्‍चे के कोरोना पॉजिटिव होने के वाजूद मां- और पिता कोरोना नेगेटिव हैं ।

आइसोलेशन वार्ड में था बच्‍चा
दरभंगा के DMCH में एक 5 महीने के बच्चे की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उसे भर्ती किया गया था । जबकि बच्चे की मां और पिता दोनों की रिपोर्ट निगेटिव आई थी । कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद पिछले दो दिनों से बच्चे को आइसोलेशन वार्ड में रखा हुआ था । जबकि बच्चे की मां आइसोलेशन वार्ड के बाहर रह रही थी । लेकिन पिछले दो दिनों से भर्ती बच्चे का मां का दूध ना मिलने के कारण रो-रो कर बुरा हाल था । ऐसे में मां, रात भर बेटे की रोने की चीख सुनती रही और खुद बिलख-बिलख कर रोती रही  ।

मां ने लिया ये फैसला
आखिरकार मां का दिल बच्‍चे की चीख पुकार से बेबस हो गया, इस मां ने अपनी जान जोखिम में डालकर बच्चे को सीने से लगाने का फैसला किया और वह जिद पर अड़ गई । शुरुआत में डॉक्टरों ने उसे काफी समझाने की कोशिश की, लेकिन वो नहीं मानी । आखिरकार, मां की ममता जीत गई । बच्‍चे की मां आइसोलेशन वार्ड के सारे सुरक्षा कवच को पार कर नर्स, डॉक्टर और गार्ड के मना करने के बाद भी बच्चे के पास पहुंच गई, और उसे गोद मे ले कर स्तनपान कराने लगी । बच्चा भी जैसे इसी इंतजार में था, मां की गोद मिलते ही वो चुप हो गया और मुस्कुराने लगा ।

भावुक हो गया माहौल
हालांकि ये घटना पूरी तरह से कोविड प्रोटोकॉल की अनदेखी थी, लेकिन मां और बेटे की ये तड़प देखकर इस मां को रोकने वाली नर्स की आंखे भी भर आईं । डॉक्टर भी खुद को भावुक होने से नहीं रोक पाए । कोरोना पॉजिटिव बच्‍चे के पास मां बिना PPE Kit पहने ही बैठी रही । इस घटना ने कुछ दिन पहले यहीं हुई उस घटना की भी याद दिला दी जब एक पिता की कोरोना से मौत के बाद पुत्र ने शव लेने से इनकार कर दिया था । जिसके बाद एक समाजसेवी संस्था ने उस शव का अंतिम संस्कार कराया । ऐसे में अब इस मां की ममता के चर्चें हो हैं । वाकई, सच ही है माता-पिता हर परिस्थिति में अपनी संतान के लिए प्राण तक देने को तैयार रहते हैं, लेकिन संतान पर परिस्थितियां हावी हो ही जाती हैं ।

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