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Friday, March 5, 2021

किन्नरों के रक्तदान पर है प्रतिबंध, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की सुनवाई पर केन्द से मांगा जवाब


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दिल्ली। रक्तदान महादान है लेकिन इसकी नियमावली पर अब सवाल उठने लगे हैं। ट्रांसजेंडर्स के रक्तदान पर लगाये गये प्रतिबंध पर सुप्रीम कोर्ट में बहस हुई। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ब्लड डोनर गाइडलाइंस 2017 की धारा 12 और 51 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई किया। कोर्ट ने केंद्र सरकार और इससे जुड़े अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस में ट्रांसजेंडर्स के रक्तदान करने पर लगाए प्रतिबंध को लेकर सवाल उठाया गया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश एसआर बोबड़े की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने टी संता सिंह द्वारा दायर की गई एक जनहित याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के बाद सरकार को केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता ने ब्लड डोनर गाइडलाइंस 2017 के दिशा-निर्देशों के मौजूदा नियमों को चुनौती दिया है।

याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत का ध्यान इसकी ओर खींचा जिसमें ट्रांसजेंडर को रक्त दान करने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। याचिका पर सीजेआई बोबडे ने कहा कि हम उत्तरदाताओं को नोटिस जारी कर रहे हैं और उनके जवाब का इतंजार करेंगे। सांता सिंह द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई इस जनहित याचिका में ब्लड डोनर दिशा-निर्देश 2017 की धारा 12 और 51 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। साथ ही साथ ही इस नियम पर रोक लगाने की मांग भी की गई है।

सीजीआई एसआर बोबडे ने कहा कि यह चिकित्सा का मामला है। हम इन मुद्दों को नहीं समझते हैं। हालांकि केंद्र सरकार को एक नोटिस जारी कर दिया गया है। ट्रांसजेंडस के रक्तदान के इस मुद्दे में विस्तृत जवाब मांगा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रक्तदाता दिशा-निर्देशों को रोकने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वह इस मुद्दे को समझे बिना आदेश पारित नहीं कर सकता है।

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