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Wednesday, March 17, 2021

यहां से हुई है रुद्राक्ष की उत्पत्ति, धारण करने से मिलते हैं हजारों लाभ


आप लोगों ने रुद्राक्ष(rudraksha) की माला को तो देखा ही होगा. ज्यादातर लोग  इसका प्रयोग मंत्र का जाप करने के लिए करते हैं. कुंभ के मेले में नागा बाबाओं को रूद्राक्ष की माला के साथ देखा जाता है.  रुद्राक्ष को हिंदू धर्म में बहुत पावन कहा गया है, इसका मुख्य कारण है इसका भगवान शिव से संबंध. कहा जाता है कि रुद्राक्ष से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है. इससे घर के हर कष्ट दूर हो जाते हैं. आज हम आपको बताएंगे कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति कब और कहां से हुई, इसके फायदे क्या क्या हैं.

कहां से हुई रुद्राक्ष की उत्पत्ति

बता दें कि रुद्राक्ष 2 शब्दों से मिलकर बना है- रुद्र और अक्ष. रुद्र का मतलब है भगवान शिव (Lord Shiva) और अक्ष का मतलब है आंसू (Tears).  शिवपुराण, पद्मपुराण, रुद्राक्षकल्प, रुद्राक्ष महात्म्य इत्यादि ग्रंथों में रुद्राक्ष की के गुणों को दर्शाया गया है. पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी सती से दूर होने पर एक बार भगवान शिव का दिल दुखी हो गया था और भगवान के नयन में से आंसू निकल पड़े और कई स्थानों पर जा गिरे. जिस जगह भी भगवा से आंसू गिरे उस जगह रुद्राक्ष (Rudraksha Tree) की उत्पत्ति हुई.कहा जाता है कि रुद्राक्ष हर किसी की मनोकामना को पूरी कर देता है.

रुद्राक्ष पहनने से फायदें-

  • कहा जाता है कि रुद्राक्ष पहनने से मानसिक और शारीरिक क्षमता में बढ़ोत्तरी होती है.
  • बाजार में रुद्राक्ष तो कई मिल जाते है, लेकिन एकमुखी रुद्राक्ष मिलना मुश्किल होता है, इसकी कीमत भी बहुत होती है, लेकिन इसको पहनने से ह्रदय से जुड़े रोग खत्म हो जाते हैं. खून का संचार होने में ये मदद करता है.
  • कहा जाता है कि 14 साल से छोटे बच्चों को छहमुखी रुद्राक्ष पहनाना चाहिए, इससे उसका मन एकाग्र होगा, जिससे वो पढ़ाई में मन लगा पाएगा.
  • ऐसा भी कहा जाता है कि जिस घर में रुद्राक्ष की नियमित तौर पर पूजा होती है, वहां पर धन धान्य से जुड़ी कोई समस्या नहीं आती है.
  • पंचमुखी रुद्राक्ष अगर महिलाएं, पुरुष या बच्चें पहने तो उनको ह्रदय संबधी कोई रोग नहीं होते हैं. तंत्रिकाएं सामान्य रहती है. बीपी से जुडी कोई दिक्कत नहीं होती है.

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