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Tuesday, March 16, 2021

2 सालों से नहीं छपा 2000 का एक भी नोट, खुद सरकार ने बताया RBI के साथ उसका क्‍या है प्‍लान


2 सालों से नहीं छपा 2000 का एक भी नोट, खुद सरकार ने बताया RBI के साथ उसका क्‍या है प्‍लान

 क्‍या आपको भी लग रहा है कि 2000 रुपये के नोट सर्कुलेशन में कम हो रहे हैं, इन दिनों  एटीएम मशीन से भी 2000 रुपये के नोट कम निकल रहे हैं । अगर आपने भी ये चीज नोटिस की है, तो आपके मन में उठ रहे सवालों का जवाब खुद सरकार ने ही दे दिया है । लोकसभा में वित्‍त्‍ राज्‍य मंत्री अनुराग ठाकुर ने बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि पिछले 2 सालों में 2000 रुपए के नोट की छपाई हुई ही नहीं है । जानें इसका कारण ।

सरकार की ओर से दी गई ये जानकारी
अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा है कि पिछले दो वर्षों में 2 हजार रुपये के एक भी नोट की छपाई नहीं हुई है, उन्होंने कहा कि नोटों की प्रिंटिंग को लेकर आरबीआई के साथ बातचीत कर सरकार फैसला लेती है । अप्रैल 2019 के बाद से एक भी नया 2000 का बैंक नोट नहीं छापा गया है । इतना ही नहीं ठाकुर ने ये भी बताया कि पिछले तीन वर्षों में लगातार 2000 रुपये के नोट प्रचलन में घटे हैं । ठाकुर ने कहा कि 30 मार्च 2018 को 2000 रुपये के 336.2 करोड़ नोट सर्कुलेशन में थे, जबकि 26 फरवरी 2021 को इसकी संख्या घटकर 249.9 करोड़ रह गई । मार्च, 2020 के अंत तक चलन में मौजूद 2,000 के नोटों की संख्या 273.9 करोड़ थी, जबकि मार्च- 2019 के अंत में 2000 के नोटों की संख्या 329.1 करोड़ थी ।

नई छपाई नहीं हुई
वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने सोमवार को संसद में एक लिखित जवाब में बताया कि-  ‘किसी भी मूल्य के बैंक नोटों की छपाई का फैसला जनता की लेन-देन की मांग को पूरा करने के लिए RBI की सलाह पर लिया जाता है।’ 2019-20 और 2020-21 में 2000 रुपये के नोट की छपाई का ऑर्डर नहीं दिया गया है । केंद्र सरकार के मुताबिक 2000 रुपये के बैंक नोट की छपाई बंद करने का फैसला इसकी जमाखोरी रोकने और ब्‍लैक मनी पर शिकंजा कसने के लिए लिया गया है ।

सरकार की ओर से दी गई जानकारी
आपको बता दें, एक रिपोर्ट के अनुसार, 2018 से तीन साल के दौरान जहां 2000 रुपये नोट का प्रचलन घटा है । जबकि इस दौरान 500 और 200 रुपये के नोटों के प्रसार में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है । मूल्य और मात्रा दोनों के हिसाब से 500 और 200 रुपये के नोट का प्रसार बढ़ा है । रिपोर्ट के मुताबिक प्रचलन में कुल मुद्राओं में 2,000 के नोट का हिस्सा मार्च, 2020 के अंत तक घटकर 2.4 प्रतिशत रह गया था । यह मार्च, 2019 के अंत तक तीन प्रतिशत और मार्च, 2018 के अंत तक 3.3 प्रतिशत था । 2016 में नोटबंदी के ऐलान के बाद सरकार ने 2000 रुपये के नोट जारी किए थे, जिसके पीछे तर्क था कि इससे कालेधन पर रोक लगाने में कामयाबी मिलेगी।

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