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Thursday, February 25, 2021

शिवसेना ने केंद्र सरकार पर कसा तंज, भारत में चीन को व्यापार के लिए क्यों मिला ग्रीन सिग्नल?

 

Shiv Sena

इन दिनों भारत और चीन के संबंधों (India- China Realtion)  पर शिवसेना ने मुखपत्र सामना (Shivsena Mouth Piece Samana) के माध्यम से निशाना बनाया है। अपने इस पत्र में शिवसेना सरकार ने दोनों देशों के संबंध को लेकर काफी सारी बातें लिखी है, सामना ने लिखा है कि लद्दाख सीमा पर हिंदुस्तान-चीन के बीच जो खीचातानी शुरु थी, वो पिछले सप्ताह खत्म हो गयी है। अब संकेत मिल रहे है कि हिंदुस्तान और चीन के व्यापारिक संबंधों मं मधुरता आने वाली है। ऐसी संभावनाएं जताई जा रही है कि चीन की करीबन 45 कंपनियों को भारत में कारोबार स्टार्ट करने की छूट दी जा सकती है। सारांश में बताया जाए तो कोविड-19 आने के बाद मोदी सरकार द्वारा चीनी कंपनियों और उनके भारत में कारोबार और निवेश संबंध में जो एक्शन लिए गए थे, वो अब फीके होते दिख रहे हैं।

चीन को कहा धोखेबाज

शिवसेना के मुखपत्र सामना (Samana) ने लिखा है कि चीनी सेना ने भारत में घुसपैठ की, जिसके कारण गलवान घाटी का हादसा हुआ, पीछे हटने को लेकर दोनों देशों की सख्त भूमिका, इस परिप्रेक्ष्य में पिछले सप्ताह चीन और हिंदुस्तान के बीच ‘सामंजस्य’ करार होता है, दोनों सेनाएं पीछे हटती हैं, सीमा पर तनाव कम होता है और यहां हिंदुस्तान-चीन व्यापार में निर्माण हुई गुत्थी के सुलझने की खबरें आ रही हैं। सरकार भले ही हाथ झटक ले परंतु सीमा पर चीन दो कदम पीछे हटा और यहां हिंदुस्तान से उद्योग-व्यापार में ‘चार कदम’ आगे बढ़ गया, इसको देख कर सब स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है।

चीन पर भरोसा नहीं

सामना ने लिखा है कि चीन भारत का सबसे बड़ा अविश्वसनीय और धोखेबाज पड़ोसी है। अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए सीमा पर पीछे हटने वाला चीन अपने मकसद को पूरा करने के बाद फिर से भारत को धोखा दे सकता है। फिर भी वहां सीमा पर चीन को पीछे धकेल दिया इसलिए ‘जीत का जश्न’ मनाना और यहां हिंदुस्तान-चीन व्यापार तनाव कैसे कम किया इसलिए पीठ थपथपाई जा रही है। आपकों बता दें कि कोरोना के प्रकोप के कारण पिछले साल टिकटॉक के साथ साथ 51 चीनी ऐप्स को भआरत से बहिस्कृत कर दिया गया था।

‘आत्मनिर्भर हिंदुस्तान’

सामना ने लिखा है कि ‘आत्मनिर्भर हिंदुस्तान’ की बात कह कर ‘चीनी कम’ नीति पर राष्ट्रवाद की झालर चढ़ाई गई। मोदी सरकार ने ये दिखाया कि वो चीन के लिए उलझनें खड़ी कर रहे है फिर भी अब आठ महीने में ऐसा क्या हो गया कि भारत 45 चीनी कंपनियों को व्यवसाय देने के लिए तैयार हो रहा है। आत्मनिर्भर और राष्ट्रवाद का ढोल खोखला साबित हुआ तो चीन के दबाव में आप नरम हो गए? हिंदुस्तान से चीन को होनेवाला निर्यात बढ़ा और 2019 के मुकाबले में हिंदुस्तान-चीन व्यापार कुछ प्रमाण में कम हुआ, ये सत्य होगा फिर भी 2020 में चीन ही व्यापार में हिंदुस्तान का सबसे बड़ा भागीदार रहा ये हकीकत है।

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