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Tuesday, February 2, 2021

जानिए, स्वास्थ्य से लेकर कृषि तक, बजट-2021 किस तरह के भारत का रोडमैप है?


वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह बजट दो दिन पहले मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम द्वारा प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण का प्रत्यक्ष प्रतिबिंब था।  सरकार ने स्वास्थ्य सेवा पर खर्च को बड़े स्तर पर बढ़ाया है। इस बढ़ोतरी का आर्थिक सर्वेक्षण में तर्क दिया गया था कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में वृद्धि से नागरिकों के जेब खर्च से बड़ी बचत होती है।

बजट भाषण में वित्त मंत्री ने बताया कि, “हमने  2021-22 के दौरान COVID टीकों के लिए 35,000 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए हैं। यदि आवश्यक हुआ तो मैं और अधिक धन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हूं।  स्वास्थ्य और कल्याण के लिए कुल बजट 137% की वृद्धि के साथ 2,23,846 करोड़ रुपए है।”

वहीं बजट के फोकस का दूसरा क्षेत्र बुनियादी ढांचा निर्माण था क्योंकि आर्थिक सर्वेक्षण ने तर्क दिया कि बड़े पैमाने पर खर्च करने से बुनियादी ढांचा न केवल आर्थिक विकास का कारण बनेगा, बल्कि उससे रोजगार सृजन भी होगा। वित्त मंत्री ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को वित्तीय मदद करने के लिए एक विकास वित्त संस्थान के निर्माण की घोषणा की क्योंकि धन की कमी के कारण देश की अधिकांश बुनियादी ढांचा परियोजनाएं या तो रुक जाती है या धीरे चलती है।

उन्होंने कहा कि, “इन्फ्रास्ट्रक्चर को दीर्घकालिक debt financing की आवश्यकता है।  एक पेशेवर रूप से प्रबंधित Development Financial Institution के  बुनियादी ढांचों के वित्तपोषण के लिए provider, enabler और catalyst के रूप में कार्य करना आवश्यक है। इसलिए हम डीएफआई की स्थापना के लिए एक विधेयक पेश करूंगी। हमने इस संस्था को शुरू करने के लिए  20,000 करोड़ की राशि प्रदान की है।” बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा, “इस डीएफआई के लिए तीन साल के समय में कम से कम 5 लाख करोड़ रुपये के पोर्टफोलियो का लक्ष्य है।”

इसके अलावा, सरकार ने चुनाव को ध्यान में रखते हुए तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, और असम में राष्ट्रीय राजमार्ग कार्यों की घोषणा की । इससे ना सिर्फ इन राज्यों को विकास होगा बल्कि बीजेपी को भी चुनावी रूप से मदद करेगा। पश्चिम बंगाल में बुनियादी ढांचे पर वित्त मंत्री की घोषणा करते हुए कहा कि, “पश्चिम बंगाल  में मौजूदा सड़क कोलकाता -सिलीगुड़ी के अपग्रेड के साथ 25,000 करोड़ रुपये की लागत से 675 किलोमीटर राजमार्ग बनेगा।” आज के समय में चुनावी रूप से बीजेपी के लिए यह राज्य सबसे महत्वपूर्ण राज्य है।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए वादे के अनुसार, 2022 तक कृषि संकट को समाप्त करने के लिए कृषि बुनियादी ढाँचे के साथ-साथ ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी प्राथमिकता दी जा रही है। कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए धन जुटाने के लिए, सरकार द्वारा मादक पेय, सोना, चांदी, कपास, मटर, सेब, पेट्रोल और डीजल सहित कई वस्तुओं पर कृषि development cess लगाया जा रहा है।

इसके अलावा, सरकार ने देश के किसानों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए कई कृषि उत्पादों के आयात पर शुल्क भी बढ़ाया। वित्त मंत्री ने कहा कि, “किसानों को लाभान्वित करने के लिए, कपास पर नील से 10 प्रतिशत और कच्चे रेशम और रेशम के धागों पर 10 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक सीमा शुल्क बढ़ाया जा रहा  है। हम इथाइल अल्कोहल पर जारी उपयोग आधारित रियायत भी वापस ले रहे हैं।”  वित्त मंत्रालय ने बताया कि मक्का चोकर, राइस ब्रान ऑयल केक, और पशु आहार जैसी वस्तुओं के दरों में समान रूप से 15 प्रतिशत की कटौती की जा रही है।

यानी देखा जाए तो बजट में मुख्य रूप से स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित किया गया था।  विनियामक संरचना के निजीकरण और अपग्रेड के लिए आधार भी दिया गया जिससे यह सुनिश्चित होता है कि भारत अगले कुछ वर्षों में “rule based capitalist economy” की ओर बढ़ेगा। कुल मिला कर यह बजट आगामी दशक में भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए रोडमैप को दृष्टि प्रदान करता है।

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