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Monday, February 8, 2021

16 लोगों को मौत के मुंह से निकालने वाले ITBP जवानों को सलाम, इन हिमवीरों से चीन भी खाता है खौफ!

 

16 लोगों को मौत के मुंह से निकालने वाले ITBP जवानों को सलाम, इन हिमवीरों से चीन भी खाता है खौफ!

बर्फीले पहाड़ों पर हजारों फीट की ऊंचाई पर देश की सरहदों की रक्षा करने वाले भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) जवानों को आज पूरा देश सलाम कर रहा है, उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने से हुई तबाही के बाद आईटीबीपी के जवान वहां फंसे लोगों को बाहर निकाल रहे हैं, जोशीमठ मलेरिया राजमार्ग पर बीआरओ पुल भी पूरी तरह से तबाह हो चुका है, जवानों ने एक मुश्किल ऑपरेशन चलते हुए अब तक 16 लोगों को मौत के मुंह से सुरक्षित निकाला है।

चीन भी खौफ खाता है
हिमालय की गोद में बैठ पहरा देने वाले इन जवानों से चीन भी खौफ खाता है, आईटीबीपी का गठन 24 अक्टूबर 1962 को भारत-चीन सीमा संघर्ष के दौरान किया गया था, तब से आईटीबीपी भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा के लिये तैनात है, बल की उच्चतम सीमा चौकी 18,800 फीट पर स्थित है, साथ ही कई सीमा चौकियों पर तापमान शून्य से 45 डिग्री तक नीचे चला जाता है। आईटीबीपी देश का अग्रणी अर्धसैनिक बल है, इसके जवान अपनी कड़ी ट्रेनिंग और व्यवसायिक दक्षता के लिये जाने जाते हैं तथा किसी भी हालत और चुनौती का मुकाबला करने के लिये हर समय तत्पर रहते हैं।

हिमवीर
सालों भर हिमालय की गोद में बर्फ से ढंकी अग्रिम चौकियों पर रहकर देश की सेवा करना इनका मूल कर्तव्य है, इसलिये इनको हिमवीर के नाम से जाना जाता है, मौजूदा समय में आईटीबीपी की कुल 56 सर्विस बटालियन, 4 स्पेशल बटालियन और 17 ट्रेनिंग सेंटर हैं, आईटीबीपी के करीब 90 हजार सैनिक देश की सेवा कर रहे हैं, साल 2004 के बाद भारत और चीन के बीच 3488 किमी की सरहद की सुरक्षा का पूरा जिम्मा आईटीबीपी के कंधों पर है।

1971 युद्ध
पड़ोसी देश पाकिस्तान से हुए साल 1971 के युद्ध में इसकी दो पलटनों ने श्रीनगर और पूंछ इलाके में घुसपैठियों के ठिकानों के अनेक क्षेत्रों की पहचान/पता लगाने तथा उन्हें नष्ट करने के विशेष कार्य को अंजाम दिया था, इस अभियान के लिये इनकी काफी सराहना भी हुई थी, 1978 में राष्ट्रीय आदेशों ने बलों की भूमिका को पुनः परिभाषित किया, जिससे इसके मूल स्वाभाव में परिवर्तन किया गया, एक बहुआयामी बल बनाने के लिये इसे विविध कार्य सौंपे गये।

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