ULFA को फंडिंग कर नॉर्थ-ईस्ट को नया कश्मीर बनाने की साजिश रच रहा है चीन-पाकिस्तान - Bollyycorn

Breaking

Bollyycorn

Bollywood-Hollywood-TV Serial-Bhojpuri-Cinema-Politics News, Gadgets News

Thursday, January 28, 2021

ULFA को फंडिंग कर नॉर्थ-ईस्ट को नया कश्मीर बनाने की साजिश रच रहा है चीन-पाकिस्तान


पूर्वोत्तर कई वर्षों तक अलगाववादी आंदोलन से जूझता रहा था। नागालैंड से लेकर मणिपुर तक कई अलगाववादी संगठन इस क्षेत्र में सक्रिय रहे। लेकिन मोदी सरकार में भारतीय सैन्य बल एवं खुफिया एजेंसियां इनको काफी हद तक काबू करने में कामयाब हुई हैं। किंतु अब चीन और पाकिस्तान इस क्षेत्र में हिंसक आंदोलन भड़काने एवं भय का माहौल बनाने के लिए सक्रियता से कार्य कर रहे हैं। हाल ही में खबर आई थी कि ULFA नामक अलगाववादी संगठन ने अरुणाचल प्रदेश में तेल उत्खनन करने वाली एक कंपनी के दो कर्मचारियों का अपहरण कर लिया था, इसके बाद फिरौती की मांग की थी। यह पहला मौका नहीं है जब प्राइवेट कंपनी के कर्मचारियों को निशाना बनाया गया है।

वस्तुतः एक लंबे समय तक पूर्वोत्तर के अलगाववादी संगठनों का यही रवैया रहा था, जिससे क्षेत्र में कार्यरत सभी आर्थिक इकाइयां बन्द हो जाएं और अधिकाधिक गरीबी एवं बेरोजगारी के कारण उनका अलगाववादी आंदोलन और तेज हो। किंतु यह सब केवल अलगाववादी तत्वों द्वारा संचालित नहीं है बल्कि इसके पीछे चीन-पाकिस्तान का हाथ है। कश्मीर में असफल होने पर पड़ोसी देश पूर्वोत्तर को जलाने की कोशिश में हैं।

चीन लंबे समय तक इस क्षेत्र में कार्यरत ऐसे संगठनों को ट्रेनिंग और हथियार मुहैया करवाता था। 1967 में उस समय के नागा विद्रोहियों के नेतृत्वकर्ताओं की पूरी ट्रेनिंग चीन में हुई थी। मणिपुर में कार्यरत अलगाववादी संगठन पर चीन का इतना प्रभाव था कि उसने अपना नाम पीपल्स लिबरेशन आर्मी रखा था, जो चीनी थल सेना का नाम है। इन संगठनों को वैचारिक खुराक भी माओवादी-कम्युनिस्ट साहित्य से ही मिलती थी जो मुख्यतः चीन से आयातित था।

ये सभी संगठन लंबे समय तक म्यांमार के जरिये, चीन के युन्नान प्रान्त तक जाते थे। बाद में 1980 के बाद जब भारत चीन सम्बंध थोड़े स्थिर हुए तो इन संगठनों की चीन में ट्रेनिंग तो बन्द हो गई, लेकिन इनको स्मगलिंग के जरिये हथियारों की आपूर्ति होती रही।

एक रिपोर्ट के मुताबिक जब भारत ने ऑपरेशन पराक्रम चलाया था तब ये संगठन इस क्षेत्र से सीमा की ओर कूच कर रही भारतीय बटालियन की जासूसी कर रहे थे, जो बताता है कि इनके पाकिस्तान के साथ भी नजदीकी रिश्ते हैं। ISI के अतिरिक्त ये संगठन बांग्लादेश के कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन Bangladesh Nationalist Party (BNP) से भी अच्छे रिश्ते रखे हुए हैं।

भले ही सरकार नार्थ ईस्ट में हिसंक प्रवृत्तियों को काफी हद तक दबा चुकी है, फिर भी ये संगठन चीन और पाकिस्तान के ‘प्रोपोगेंडा टूल’ की तरह इस्तेमाल हो सकते हैं, जो इस क्षेत्र में सरकार द्वारा निवेश को आमंत्रित करने की योजनाओं के विरुद्ध जा सकता है।

वर्ष 2019 में भारत सरकार ने जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे को गुवाहाटी में एक कार्यक्रम में आमंत्रित किया था, जिसमें जापानी कंपनियों द्वारा इस क्षेत्र में निवेश की घोषणा होने की संभावना थी। हालांकि वह दौरा रद्द हो गया किंतु यह भारत सरकार की मंशा को दर्शाता है। हाल ही में अरुणाचल में वनैडियम जैसी बहुमूल्य धातु मिली है, जिसके बाद इस क्षेत्र में निवेश की संभावना बढ़ रही है। ऐसे में चीन पाकिस्तान की कोशिश है कि कैसे भी पुनः इस क्षेत्र को अस्थिर किया जाए।

किंतु जमीन पर उनकी यह योजना अधिक कारगर साबित नहीं हो रही इसलिए प्रोपोगेंडा का इस्तेमाल भी भरपूर हो रहा है। जैसे हाल में ULFA ने असम के डिगबोई में आर्मी कैम्प में एक ब्लास्ट की जिम्मेदारी ली थी। यह खबर प्रधानमंत्री के असम दौरे के थोड़ी देर पहले फैलाई गई थी, जिससे मीडिया की नजर इस बात पर पड़े। किंतु सेना ने ऐसे किसी ब्लास्ट बात को खारिज किया।

यह प्रकरण बताता है कि उल्फ़ा  जैसे संगठनों की योजना केवल भय फैलाने की है, भले आतंकी घटनाओं को अंजाम देकर फैलाया जाए, किडनैपिंग करके फैलाया जाए या अफवाह के दम पर। उनका उद्देश्य केवल अपने आकाओं के हितों की पूर्ति है, जो नहीं चाहते कि इस क्षेत्र में निवेश का माहौल हो।

पहले कश्मीर को मुद्दा बनाकर भारत को घेरा जाता था। अब जब पाकिस्तान और चीन कश्मीर में अस्थिरता फैलाने में असफल हो रहे हैं तो वे नॉर्थ ईस्ट को नया कश्मीर दिखाना चाहते हैं, किंतु उनकी योजना सफल नहीं होगी।

source

आपको ये पोस्ट कैसी लगी नीचे कमेंट करके अवश्य बताइए। इस पोस्ट को शेयर करें और ऐसी ही जानकारी पड़ते रहने के लिए आप बॉलीकॉर्न.कॉम (bollyycorn.com) के सोशल मीडिया फेसबुकट्विटरइंस्टाग्राम पेज को फॉलो करें।

No comments:

Post a Comment