बौने परिवार ने सरकार से लगाई गुहार, कहा— हमें भी दिला दो आवास

 

श्रावस्ती। सरकार की अधिकत्तर योजनाएं गरीबों के लिए हैं, बावजूद इसके आज भी गरीब—मजदूर खुले आसमान के नीचे रहने को अभिशप्त हैं। केंद्र और राज्य सरकारों ने गरीबों को छत मुहैया कराने के लिए कई योजनाएं चलाई। लेकिन हकीकत यह है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी देश के अधिकत्तर राज्यों में गरीब—मजदूरों को आज भी छत नसीब नहीं हो सका है। केंद्र सरकार के साथ ही उत्तर प्रदेश में भी भाजपा की सरकार है, बावजूद इसके कई ग्रामीण क्षेत्र ऐसे हैं जहां के कई परिवार झुग्गी—झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। ऐसा ही एक परिवार श्रावस्ती का रहने वाला है। यह परिवार बरसों से अपनी टूटी हुई झोपड़ी में गुजर—बसर कर रहा है। बौनों का यह परिवार कच्चे मकान में रहता है, जिसकी दीवारें इतनी कमजोर हैं कि कभी भी गिर सकती हैं।

गौरतलब है कि सूबे के श्रावस्ती जिले के हरदत्त नगर गिरन्ट के केवटन पुरवा गांव में एक ऐसा परिवार रहता है जिसका हर सदस्य बौना है। इस गरीब परिवार के साथ न सिर्फ कुदरत ने मजाक किया है बल्कि प्रशासनिक अमलों ने भी इनके साथ क्रूर व्यवहार किया है। इस परिवार के सामने दो वक्त की रोटी जुटा पाने का घोर संकट है। राजवन अपने भाई और पत्नी के साथ इस टूटे—फूटे घर में बेबसी की जिंदगी काट रहा है। यह पूरा परिवार 3 फीट का है। बौनों का परिवार होने के नाते यह लोग मेहनत मजदूरी करने में भी असमर्थ हैं।

बता दें कि जब बरसात होती है तो इस परिवार पर आफत की बारिश होती है। क्योंकि यही खस्ताहाल घर इस परिवार की विरासत है। राजवन आसपास के जंगल से लकड़ी इक्कठा कर बाजार में बेचकर अपने परिवार की जीविका चलाता है। सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने की वजह पर बात करने पर राजवन ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर किसी के सपने को साकार कर रहे हैं। हम लोगों को भी उम्मीद जगी थी कि हो सकता है ​हमारा भी घर का सपना पूरा हो जाए। इसी उम्मी से पिछले पांच वर्षों से सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगा रहा हूं। लेकिन अभी तक कहीं से कोई उम्मीद की किरण नजर नहीं आ रही है।

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