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Tuesday, January 26, 2021

नहीं मान रहा पाकिस्तान..भारत में हो रहे किसान आंदोलन पर दे दिया ऐसा बयान

‘खुद के मसले तो संभलते नहीं हैं और चले हमें ज्ञान देने’। यदि वर्तमान में इस वक्तव्य का इस्तेमाल पाकिस्तान के लिए किया जाए तो यह बिल्कुल उचित रहेगा। जी हां… बिल्कुल ठीक रहेगा.. वो इसलिए चूंकि भारत के कई मौकों पर समझाने के बावजूद भी पाकिस्तान बाज नहीं आ रहा है और उत्तरोत्तर भारत को हिदायतों का पाठ पढ़ाने में लगा है। अभी उसने अपनी ताजा हिदायत  भारत में हो रहे किसान आंदोलन के संदर्भ में दी है। उसने अपने बयान में कहा कि भारत को किसानों की बात सुननी चाहिए। पूरा भारत आज किसानोें के साथ खड़ा है। भारत की दमनकारी नीति अब पूरी दुनिया के सामने परिलक्षित हो रही है। यह उक्त बयान पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुऱैशी ने दिया है। 

भारत कई बार स्पष्ट कर चुका है कि पाकिस्तान भारत के आंतरिक मसलों पर कोई हस्तक्षेप न करें, लेकिन पाकिस्तान मानने को तैयार नहीं है। इससे पहले कनाडा ने भी ऐसी ही हिमाकत की थी, जब कनाडाई  प्रधानमंत्री जस्टिन टूडो ने भारत में हो रहे किसानों के आंदोलन पर चिंता व्यक्त की थी। उस वक्त भी भारतीय विदेश मंत्रालय ने सख्त रूख अख्तिायर करते हुए कनाडा को सख्त हिदायत दी थी कि वो  भारत के आंतरिक मसलों पर हस्तक्षेप करने की जमहत न उठाए। वहीं अब कुछ ऐसी ही गलती पाकिस्तान भी करता दिख रहा  है। हालांकि शाह महमूद कुरैशी के इस बयान के बाद भारत की तरफ से किसी तरह की प्रतिक्रिया तो सामने नहीं आई है, मगर  उम्मीद है कि उसे फिर से एक कड़ा जवाब जरूर मिेलेगा।

वहीं शाह महमूद कुरैशी यही नहीं रूके। वो जम्मू-कश्मीर के मसले पर भी अर्नगल प्रलाप करते चले गए। भारत पर तोहमतों की बारिश करते हुए कहा कि भारत ने बिना सोचे समझे जम्मू-कश्मीर को लेकर इतना अहम फैसला ले लिया और एक मर्तबा  भी हमारे वजीर-ए-आलम इमरान  खान से नसीहत लेना गवारा न समझा। हालांकि भारत ने जब  5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त किया था। तब  भारत ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया था कि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और उसे अपने किसी भी देश का उसके आंतरिक मसलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। अगर बावजूद इसके कोई मुल्क ऐसा करता है, तो   उसे इससे बचना चाहिए। 

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