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Monday, January 25, 2021

पिता को लगता था बेटा चपरासी बनेगा, लेकिन बेटा बना टीम इंडिया का भरोसेमंद बल्लेबाज

 

Murli-Vijay

Murli Vijay Struggle Story: खेल जगत में ऐसे कई खिलाड़ी हैं जिन्होंने बुलंदियों को छूने के लिए कई संघर्षों का सामना किया है. कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें एक बार में सफलता नहीं मिली पर खिलाड़ियों ने कभी हिम्मत नहीं हारी. टीम इंडिया (Team India) में ही एक ऐसा खिलाड़ी है जिनके पिता को लगता था कि उनका बेटा चपरासी बनेगा. जी हां, और ये वो खिलाड़ी है जिसने 61 टेस्ट मैच, 3982 रन. 12 शतक और 15 अर्धशतक बनाए हैं और हर परिस्थिति में खुद को साबित करके दिखाया है.

पिता को लगता था बेटा करेगा चपरासी की नौकरी

टीम इंडिया के दिग्गज खिलाड़ी मुरली विजय (Murli Vijay) जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर मुकाम हासिल किया है. भले ही मुरली अब टीम इंडिया का हिस्सा नहीं है लेकिन इनकी कहानी वाकई सबके लिए प्रेरणादायी है. मुरली विजय ने काफी लंबे समय तक टीम इंडिया की ओपनिंग का जिम्मा बखूबी संभाला और ऐसे-ऐसे कारनामे किए जिन्हें देखकर मुरली विजय का परिवार भी हैरान रह गया.

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मुरली विजय का जन्म 1 अप्रैल 1984 को चेन्नई में हुआ है. मुरली विजय एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते हैं जो मिडिल क्लास जरूर हैं लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर नहीं रहा. पर मुरली विजय पढ़ाई में इतने कमजोर थे कि, बेटे की हालत को देखते हुए उनके पिता को लगने लगा था कि मुरली बड़े होकर चपरासी की ही नौकरी करेंगे. क्योंकि, मुरली 12वीं क्लास में फेल तक हो गए थे और 17 साल की उम्र में घर छोड़ दिया.

बेटे के घर छोड़ने से परिवार काफी परेशान था और उन्हें लगता था कि कहीं फेल होने की वजह से मुरली कोई बड़ा कदम ना उठा लें. पर मुरली की सोच कुछ और ही थी. उन्होंने अपने माता-पिता को भरोसा दिलाया कि वो कभी आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठाएंगे. पर वो अपने मुताबिक रहना चाहते हैं जिससे खुद को पहचान सकें.

ऐसे शुरू हुआ क्रिकेट का सफर

घर छोड़कर मुरली विजय अपने दोस्तों के घर गए और कई बार उन्हें चेन्नई YMCA और IIT क्रिकेट ग्राउंड में भी सोना पड़ा. ये उस वक्त की बात है जब मुरली खुद को तलाश करने की कोशिश कर रहे थे और अपने अंदर छुपे टैलेंट को बाहर लाना चाहते थे.मुरली विजय परिवार से दूर होकर क्रिकेट खेलने लगे और खर्चा चलाने के लिए स्नूकर पार्लर में काम भी करने लगे. इसी दौरान टीम इंडिया के मौजूदा गेंदबाजी कोच भरत अरुण ने मुरली की प्रतिभा को पहचान लिया और खुद उन्हें चेन्नई क्रिकेट लीग खेलने का मौका दिया और मुरली भी सबकी उम्मीदों पर खरे उतरे,

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21 की उम्र में रणजी के लिए तैयार

मुरली की उम्र महज 21 साल थी जब वह तमिलनाडु रणजी टीम में चुने जाने के लिए तैयार हो गए थे पर बाल लंबे होने की वजह से वह सिलेक्ट नहीं हो पाए. लेकिन मुरली ने हिम्मत नहीं हारी और 2006 में दिल्ली के खिलाफ टेस्ट डेब्यू में 59 रनों की शानदार पारी खेलकर सबको चौंकाया.मुरली वनडे क्रिकेट में सफल नहीं हो पाए पर आईपीएल में उनहोंने अपने नाम दो शतक किए. मुरली के संघर्ष की कहानी सिर्फ यही सीख देती है कि, मन में हो हौंसला तो मुश्किल से मुश्किल डगर भी आसान हो जाती है.

source- sportsgaliyara.com

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