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Saturday, January 2, 2021

प्रशांत भूषण ने एक बार फिर फैलाया झूठ, मस्जिद में भगवा लहराने की, मंदिर तोड़ने से की तुलना!

 


लगता है प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट प्रकरण से कोई सीख नहीं ली है, तभी वे एक बार फिर सफेद झूठ बोलने पर उतर आए हैं। हाल ही में पाकिस्तान में एक हिन्दू मंदिर को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में कट्टरपंथी मुसलमानों द्वारा ध्वस्त किए जाने पर तुरंत प्रशांत भूषण ने इसकी तुलना न केवल मध्य प्रदेश में एक घटना से की, बल्कि मध्य प्रदेश की सरकार और हिंदुत्ववादी संगठनों पर बेतुके और बेबुनियाद आरोप लगाए।

प्रशांत भूषण एक तुलनात्मक ट्वीट करते हुए टिप्पणी करते हैं, “धर्मनिरपेक्ष हिंदुस्तान, कहाँ तुम चले गए” –

इस तुलनात्मक ट्वीट में उन्होंने दोनों घटनाओं से जुड़े तथ्य साझा करते हुए हिन्दुत्व पर हमला करने का प्रयास किया। उनके अनुसार इस्लामिक पाकिस्तान में जब एक मंदिर पर हमला हुआ और उसे ध्वस्त किया गया, तो पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 26 लोगों को गिरफ्तार किया। इसके बारे में मीडिया ने कवरेज भी की, और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले का संज्ञान लिया।

लेकिन उसकी तुलना में जब मध्य प्रदेश में एक मस्जिद पर हमला हुआ, तो उलटे मुसलमानों पर ही रासुका लगा दिया। इस कार्रवाई पर न तो मीडिया ने कोई रिपोर्ट की, और न ही सुप्रीम कोर्ट को इसकी परवाह है।

ये न सिर्फ सफेद झूठ है, बल्कि पूरे देश को दंगों की आग में झोंकने के लिए एक नापाक साजिश प्रतीत होती है। मध्य प्रदेश में जो घटनाएँ हुई हैं, उसमें प्रशांत भूषण के दावों के ठीक उलट मस्जिद को न कोई नुकसान हुआ है, और न ही मुसलमानों पर मस्जिदों पर हुए हमले के लिए रासुका के अंतर्गत कार्रवाई होगी।

दरअसल श्रीरामजन्मभूमि परिसर के पुनर्निर्माण के लिए राज्य भर में सनातनी संगठन चन्दा इकट्ठा करने निकले थे। लेकिन इंदौर और उज्जैन में जैसे ही यह संगठन इस्लामिक बहुल इलाकों से गुजरे, इन पर कट्टरपंथी मुसलमानों ने जमकर पत्थरबाजी की। फलस्वरूप मध्य प्रदेश ने अपनी कार्रवाई में फरार दोषियों पर रासुका लगाई, और जिन अवैध घरों से पत्थरबाजी की गई, उन्हे ध्वस्त भी कराया। इसके अलावा अभी जिन मस्जिदों को क्षतिग्रस्त करने का प्रयास किया था, उसके पीछे 100 लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है ।

ऐसे में प्रशांत भूषण एक बार फिर आग से खेलते हुए दिखाई दिए हैं। जिस प्रकार से उन्होंने यह घटिया तुलना की है, उस हिसाब से वह एक तरह से कट्टरपंथी मुसलमानों का ही बचाव करते दिखाई दे रहे थे। शायद उन्हे ये पता नहीं है कि इस तरह के अपमानजनक कृत्यों के लिए अब उन्हे कोई माफी नहीं मिलने वाली है, और यदि उन्होंने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट से पंगा लेने की सोची, तो अबकी बार सुप्रीम कोर्ट की वर्तमान पीठ भी पहले की तरह शालीनता से नहीं पेश आएगी।

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