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Monday, January 25, 2021

भारत की वो खूबसूरत रानी जिसने तलाक के लिए बदला धर्म, 3 बच्‍चे छोड़कर बड़ौदा महाराजा से रचाया विवाह

 

भारत की वो खूबसूरत रानी जिसने तलाक के लिए बदला धर्म, 3 बच्‍चे छोड़कर बड़ौदा महाराजा से रचाया विवाह

बड़ौदा की महारानी सीता देवी इतनी खूबसूरत थीं कि उन्‍हें देखते ही राजा-महाराजा उन पर लट्टू हो जाते थे । वो एक छोटी तेलुगू रियासत की रानी थीं, उस समय की अमीर पार्टियों की शान थीं । महारानी सीता देवी आजादी से पहले भारत ही नहीं बल्कि यूरोप में भी आकर्षक महिलाओं में शुमार की जाती थीं । उनका मोनाको में शानदार किलेनुमा बंगले में आशियाना था, ऐसे जेवरात पहनती थीं कि देखने वाले की आंखें चौंधिया जाएं ।

शादीशुदा थीं जब बड़ौदा के महाराजा से प्‍यार हुआ
सीता देवी को जब पहली शादी के बाद महाराजा ऑफ बड़ौदा से प्यार हुआ तो सनसनी मच गई, लेकिन उनकी होना एक चुनौती बन गया था । पति अप्‍पराव ने तलाक देने से साफ इनकार कर दिया था । लेकिन रानी ने भी ठान ली थी, उन्होंने मुस्लिम धर्म अपनाकर कोर्ट में दलील दी कि वो गैर मुस्लिम पति के साथ नहीं रह सकतीं । अदालत ने तलाक दिलवाया, तो फिर से हिंदू बनकर महाराजा ऑफ बड़ौदा से शादी रचाई ।

मद्रास में हुआ था जन्‍म
सीता देवी, मद्रास में जन्‍मीं थीं । पिता राव वेंकट कुमार, तेलगु रियासत पीतमपुर के राजा थे । सीता देवी की खूबसूरती के दूर-दूर तक चर्चे थे, उनकी शादी वाययुर के जमींदार एमआर अप्पाराव बहादुर से हुई थी । उनके तीन बच्चे भी हुए । सीता देवी को जो देखता उनका दीवाना हो जाता, वो हैदराबाद निजाम की बहू प्रिंसेस निलोफर की खास सहेली थीं ।

बड़ौदा के महाराजा से शादी का किस्‍सा
1943 में उनकी मुलाकात मद्रास हॉर्स रेस कोर्स में बड़ौदा के राजा प्रताप सिंह गायकवाड़ से हुई, शादीशुदा रानी प्रताप सिंह के प्‍यार में ऐसी पड़ीं की अपना सब कुछ छोड़कर महाराजा की हो गई । रानी जहां 3 बच्‍चों की मां थीं, वहीं महाराज 4 बच्‍चों के पिता थे । पति अप्‍पराव से तलाक लेने के बाद सीता देवी महाराज की दूसरी पत्‍नी बन गईं और मोनाको में किलेनुमा बंगला खरीदा, वहां वो आलीशान जिंदगी जीने लगीं ।

महाराजा की शादी भी था पेंच
हालांकि सीता देवी से शादी करने के लिए महाराजा प्रताप गायकवाड़ के सामने भी समस्‍याएं थीं । अंग्रेज सरकार का बड़ौदा में कानून था कि पहली पत्नी के रहते हुए कोई दूसरी शादी नहीं कर सकता । लेकिन महाराजा के काफी कहने के बाद अंग्रेज सरकार ने उनको महाराजा होने के नाते कानून से छूट दी । लेकिन इसके साथ ये भी शर्त रखी कि प्रताप गायकवाड़ के बाद बड़ौदा राजघराने का उत्तराधिकारी पहली पत्नी का बेटा होगा । शादी के बाद महाराजा पत्‍नी को यूरोप टूर पर ले गए । महारानी को मोनाको पसंद आ गया था, वो वहीं बस गईं ।

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