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Tuesday, December 22, 2020

मुस्लिम-ईसाई भाईचारे को Turkey ने तोड़ा, केरल में कांग्रेस-मुस्लिम लीग को ईसाइयों से मिला बड़ा झटका


 कांग्रेस का मुस्लिम तुष्टीकरण और एक मुश्त वोट बैंक का प्रेम अब उस पर लगातार भारी पड़ रहा है, जिसकी ताजा झलक केरल के निकाय चुनाव में उसकी हार के रूप में भी देखने को मिली है। खास बात ये है कि इसमें तुर्की की हागिया सोफिया मस्जिद ने बटरफ्लाई इफेक्ट का काम किया है।

चर्च से मस्जिद बनाने का फैसला वहां तुर्की में हुआ, लेकिन उसका असर यहां कांग्रेस को झटका दे गया है और उसका राज्य में जनाधार घट गया है क्योंकि उसका मजबूत ईसाई वोट बैंक उससे छिटक कर एलडीएफ की तरफ जा चुका है। कांग्रेस सहयोगी मुस्लिम लीग के बयानों ने इस हार में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

छोटी सी चिंगारी कब आग का रूप ले ले, ये अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है। कुछ ऐसा ही तुर्की की हागिया सोफिया चर्च के साथ हुआ है जिसे चर्च से मस्जिद में बदलने का फैसला तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप आर्दोगान ने किया था। इस फैसले पर भारत के मुस्लिम बड़े खुश हुए और केरल की मुस्लिम लीग तो झूमने ही लगी। उसने तुर्की के इस फैसले को समर्थन दे दिया, जबकि मुस्लिम लीग की ये खुशी केरल के ईसाई समुदाय को रास नहीं आई, और उसका सीधा असर केरल के निकाय चुनाव में दिखाई पड़ा, जहां कांग्रेस की भद्द पिट गई है।

केरल की सत्ताधारी एलडीएफ भी ईसाई समुदाय की नाराजगी समझ चुकी थी जिसके चलते लेफ्ट के ही एक सदस्य कोडियारी बालाकृष्णन ने मुस्लिम लीग पर तंज कसा और उन्हें उनके दोहरेपन के लिए आड़े हाथों लिया । उन्होंने लिखा, “आखिर मुस्लिम लीग कैसे अब बीजेपी के राम मंदिर बनाने के निर्णय का विरोध कर पाएगी। उस जगह पर पहले एक मस्जिद थी। जिसे गिरा दिया गया।”

एलडीएफ की तरफ से इस दौरान जमात-ए-इस्लामी पर भी निशाना साधा गया क्योंकि वो तुर्की के इस फैसले का खुलकर समर्थन कर रहा था और मुस्लिम लीग तो समर्थन दे ही रही थी। इन दोनों वेलफेयर पार्टियों के साथ कांग्रेस का गठबंधन है। कांग्रेस हमेशा मुस्लिम-ईसाई वोट बैंक से अपनी सियासत करती थी। उसे इस बार निकाय चुनाव में गठबंधन की सहयोगी पार्टियों मुस्लिम लीग और जमात-ए-इस्लामी के हागिया सोफिया पर बड़बोले बयानों ने नुकसान पहुंचाया है, क्योंकि कांग्रेस को चुनावों में बड़ी हार का सामना करना पड़ा है।

केरल के चर्च इस मुद्दे पर लगातार तुर्की के खिलाफ बयान बाजी कर रहे थे और मुस्लिम लीग पर निशाना साध रहे थे जिसका सीधा फायदा मुख्यमंत्री पिनरई विजयन की पार्टी एलडीएफ को मिलता दिख रहा था। केरल के निकाय चुनाव में केरल के ईसाई समुदाय ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए निकाय चुनाव में सारा समर्थन एलडीएफ को दे दिया जिसके चलते एलडीएफ अपने केरल के निकाय चुनाव में एकतरफा जीत हासिल की है।

इसी का एक बड़ा फायदा बीजेपी को भी मिला जिसके चलते बीजेपी का जनाधार पिछली बार से ज्यादा मजबूत हुआ है। केरल के चुनावों में कई सालों से मुस्लिम-ईसाई भाईचारा देखने को मिल रहा था जहां दोनों समुदायों के लोग एक मुश्त वोट डालते थे लेकिन मुस्लिम लीग के हागिया सोफिया के मुद्दे पर दिए गए बयान ने इस भाईचारे पर पानी फेर दिया है।

जहां एक ओर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं तो वहीं एलडीएफ और बीजेपी जैसी पार्टियों के लिए ये बड़ा मुद्दा बन गया है। राज्य में लगातार मुस्लिमों के विस्तार और लव जिहाद के मुद्दे पर सभी राजनीतिक पार्टियों से खफा होकर चर्च बीजेपी की तरफ आ रहे हैं, जो बीजेपी के लिए विधानसभा चुनावों के लिहाज से अहम हो सकता है।

केरल के इस बदले राजनीतिक स्वरूप की एक बड़ी वजह केवल हागिया सोफिया साबित हुआ, जिसका बटरफ्लाई इफेक्ट वहां से हजारों किलोमीटर दूर हिंदुस्तान में देखने को मिला है।

हागिया सोफिया चर्च को गिरा वहां मस्जिद बनाने के ऊपर केरल की मुस्लिम लीग ने प्रसन्नता प्रकट की है जिसे देख राज्य के ईसाइयों का कांग्रेस और मुस्लिम लीग से मोह भंग होने लगा है l

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