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Thursday, December 3, 2020

MDH धर्मपाल गुलाटी- कभी तांगा चलाकर भरते थे पेट, फिर ऐसे खड़ा किया करोड़ों का बिजनेस!

 

MDH धर्मपाल गुलाटी- कभी तांगा चलाकर भरते थे पेट, फिर ऐसे खड़ा किया करोड़ों का बिजनेस!

असली मसला सच-सच, एमडीएच-एमडीएच, ये विज्ञापन शायद ही कोई होगा, जिसने ना देखा और सुना हो, मसाला किंग के रुप में मशहूर उद्योगपति एमडीएच मसाले के मालिक धर्मपाल गुलाटी का आज सुबह 5.38 बजे निधन हो गया, कोरोना से ठीक होने के बाद हार्ट अटैक की वजह से उनकी मौत हुई है। 98 साल की उम्र में धर्मपाल ने आखिरी साल ली, उनके पार्थिव शरीर को जनकपुरी से वसंत विहार वाले घर पर ले जाया जाएगा।

पाकिस्तान से भारत आये थे
आइये आज हम आपको उनकी सफलता की कहानी बताते हैं, कि कैसे पाकिस्तान से भारत आकर उन्होने करोड़ों का बिजनेस खड़ा कर दिया। महाशय धर्मपाल गुलाटी की कंपनी महाशियन दी हट्टी (एम़डीएच) ग्रुप की वैल्यूशन इस समय करीब दो हजार करोड़ से ज्यादा है, लेकिन उनकी सफलता के बारे में कम ही लोग जानते हैं, रोजगार की तलाश में दिल्ली आकर उन्होने तांगा चलाना शुरु किया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था, इसलिये उन्होने वो तांगा अपने भाई को देकर मसाले बेचना शुरु किया, उनका मसाला लोगों की जुबान पर ऐसा चढा कि देशभर में धूम मच गई।

दिल्ली आकर तांगा चलाना शुरु किया
धर्मपाल गुलाटी देश बंटवारे से पहले पाकिस्तान रहते थे, वो परिवार के साथ दिल्ली आये, उनके लिये नई जगह पर पैसा कमाना सबसे बड़ी चुनौती थी, उन दिनों धर्मपाल की जेब में 1500 रुपये थे, पिता से मिले इन रुपयों में से 650 रुपये का धर्मपाल ने घोड़ा और तांगा खरीद लिया, फिर रेलवे स्टेशन पर तांगा चलाने लगे, कुछ दिनों बाद उन्होने तांगा भाई को दे दिया और करोलबाग के अजमल खां रोड पर एक छोटा सा खोखा लगाकर मसाले बेचना शुरु कर दिया।

कारोबार चल निकला
धर्मपाल ने मिर्च मसालों का जो साम्राज्य खड़ा किया, उसकी नींव इसी छोटे से खोखे पर रखी गई थी, जैसे-जैसे लोगों को पता चला कि सियालकोट की देगी मिर्च वाले अब दिल्ली में हैं, धर्मपाल का कारोबार तेजी से फैलता चला गया, 60 के दशक तक महाशियां दी हट्टी करोलबाग में मसालों की एक मशहूर दुकानी बन चुकी थी। इसके बाद उन्होने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में दुकान दर दुकान खरीदते चले गये। उन दिनों बैंक से कर्ज का रिवाज नहीं था, लेकिन धर्मपाल ने जोखिम उठाया, उन्होने 1959 में दिल्ली के कीर्ति नगर में मसाले तैयार करने की अपनी पहली फैक्ट्री लगाई थी, फिर उन्होने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा, साल दर साल उनका मसाला लोगों के बीच मशहूर होता चला गया।

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