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Saturday, December 19, 2020

‘श्रीलंका की गलतियों से सीखिए’ CDS जनरल बिपिन रावत ने नेपाल को चीन से सावधान रहने की दी सलाह

 


भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत ने नेपाल को एक चेतावनी देते हुए कहा है कि वह किसी भी देश के साथ दोस्ती करने के लिए स्वतंत्र है लेकिन श्रीलंका और कुछ अन्य देशों के उदाहरण से सीख लेते हुए उसे चीन से सतर्क रहना होगा। जनरल रावत नेपाल इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन ऐंड एंगेजमेंट (NIICE) के दूसरे वार्षिक सम्मेलन में दोनों देशों के संबंधों पर बोल रहे थे।

इस दौरान उन्होंने कहा, “नेपाल अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपने हिसाब से किसी भी देश के साथ संबंध बढ़ाने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन उसे श्रीलंका और अन्य देशों के कुछ मामलों से सतर्क रहना चाहिए।” यह इशारा किसी और के लिए नहीं बल्कि चीन के लिए ही था। उन्होंने कहा है कि भारत-नेपाल के संबंध सदियों पुराना है। वर्तमान युग में, नेपाल अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के आधार पर चीन सहित अन्य राष्ट्रों के लिए अपने द्वार खोल रहा है।


जनरल बिपिन रावत का यह बयान स्पष्ट रूप से चीन के ऋण जाल की ओर इशारा था कि किस तरह से चीन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के नाम पर कई देशों को कर्ज में डूबा चुका है और फिर उनके विदेश नीति को अपने हिसाब से चलाने के लिए दबाव बना रहा है।

यही नहीं भारत को चिंता है कि चीन अपने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के माध्यम से देश के हितों के खिलाफ काम करने के लिए नेपाल की आंतरिक राजनीति में भी हस्तक्षेप कर रहा है। यही कारण है कि कुछ महीने पहले नेपाल के पीएम ने भारत के खिलाफ बॉर्डर विवाद छेड़ दिया था, परंतु समय के साथ अब संबंधों में मधुरता आई है।

बता दें कि जब श्रीलंका पर महिंदा राजपक्षे का शासन था, तब उन्होंने चीन के साथ अपने सम्बन्धों को खूब बढ़ाया। भारत सहित सभी देश जब श्रीलंका पर मानवाधिकार उल्लंधन का आरोप लगा रहे थे, तब चीन ने महिंद्रा राजपक्षे का साथ दिया और वे इसे चीन की दोस्ती समझ बैठे।

इसके बाद जब 2015 में मैत्रीपाल सिरिसेना ने कमान संभाली तब भी श्रीलंका चीन के पंजों में ही जकड़ा रहा। सीरिसेना के चीन समर्थन के कारण श्रीलंका ऋणजाल में फँसता चला गया। बीजिंग ने ना सिर्फ सीरिसेना को साझेदारी के नाम पर ऋण जाल में फंसाया, अपितु वर्ष 2017 में उसके हम्बनटोटा बंदरगाह को भी अपने अधिकार में ले लिया।

परंतु जैसे ही पिछले वर्ष नवंबर में सत्ता परिवर्तन हुआ वैसे ही इस पड़ोसी देश के भारत के प्रति रुख में बदलाव आया। नेपाल को भी अब श्रीलंका के उदाहरण से सीख लेते हुए चीन के किसी भी लालच पर सोच समझ कर कदम उठाना चाहिए।

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