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Thursday, December 10, 2020

अमेरिका में बाइडन के सत्ता में आने के साथ ही मैक्रों कट्टरपंथी इस्लाम के खिलाफ भारत का साथ चाहते हैं

 


फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने पिछले कुछ महीनों से कट्टरपंथी इस्लाम के खिलाफ एक भीषण युद्ध छेड़ा हुआ है। इस्लामिस्ट विचारधारा के खिलाफ उनकी कार्रवाई के कारण पाकिस्तान, तुर्की और मलेशिया जैसे देशों में उनका कड़ा विरोध भी देखने को मिला है। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि अमेरिका में जो बाइडन के सत्ता संभालने के बाद Macron की कट्टर-इस्लाम विरोधी लड़ाई पर उसका क्या प्रभाव पड़ेगा? Democrat नेता जो बाइडन पूर्व में ट्रम्प के तथाकथित “Muslim ban” को हटाने की बात कह चुके हैं। इसी के साथ-साथ वे कट्टरपंथी इस्लाम के खिलाफ उठाए गए कदमों को इस्लाम विरोधी करार देने का काम भी कर चुके हैं। ऐसे में अब Macron अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के साथ मिलकर अतिवाद और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की बात कर रहे हैं।

बीते सोमवार को Macron ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत करते हुए Indo-Pacific नीति, सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ अतिवाद, आतंकवाद और कट्टरपंथ जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा की। बता दें कि यह चर्चा इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत उन चुनिन्दा देशों में से एक था जिसने उनकी इस इस्लामिस्ट-विरोधी लड़ाई को सबसे पहले अपना समर्थन दिया था। अक्टूबर महीने में फ्रांस में एक 18 वर्षीय आतंकवादी द्वारा एक अध्यापक का गला रेतकर मारे जाने की खबर सामने आई थी। उस अध्यापक ने अपनी कक्षा में प्रॉफ़ेट मोहम्मद के कार्टून का प्रदर्शन किया था, जिसे इस्लाम में Blasphemy माना जाता है। उसके बाद Macron ने अपने यहाँ कट्टरपंथी इस्लाम के खिलाफ युद्ध छेड़ा था, जिसके बाद पाकिस्तान ने उनपर मुस्लिमों पर बांटने का आरोप लगाया, तो वहीं तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने उन्हें मानसिक तौर पर दिवालिया घोषित कर दिया था। उस वक्त भारत पहला एशियाई देश था जो खुलकर Macron के समर्थन में आया था।

भारत के समर्थन के बाद भारत में मौजूद फ्रांस के राजदूत का एक बेहद रोचक ट्वीट देखने को मिला था। राजदूत ने ट्वीट कर कहा था “आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत और फ्रांस सदैव एक दूसरे को अपने साथ खड़ा पाएंगे।” अब जब White House में जो बाइडन की एंट्री होने जा रही है, तो ऐसे में फ्रांस के लिए भारत का समर्थन और ज़्यादा महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। बाइडन अक्सर ट्रम्प की तथाकथित मुस्लिम विरोधी नीतियों का विरोध करते थे और वे इसे “गैर-संवैधानिक” भी कहते थे। अक्टूबर में ही बाइडन ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था “एक दिन मैं ट्रम्प के गैर-संवैधानिक Muslim Ban को हटा दूँगा। मैं कांग्रेस के माध्यम से Hate Crime के खिलाफ कानून पास करूंगा। मुझे लगता है कि अमेरिका के विकास में मुस्लिमों का भी उतना ही योगदान है, जितना कि बाकी अमेरिकी नागरिकों का।”

ऐसे में इस बात की अटकलें लगाई जा सकती हैं कि जब बाइडन सत्ता में आएंगे, तो वे Macron के तथाकथित “इस्लाम-विरोधी” रवैये को लेकर उनपर दबाव बना सकते हैं। ऐसे में Macron ने PM मोदी से बातचीत कर और उनसे समर्थन लेकर वैश्विक समुदाय को एक कड़ा संदेश भेजने की कोशिश की है कि वे अपनी इस्लामिस्ट विचारधारा-विरोधी लड़ाई को जल्द ही खत्म करने के मूड में तो बिलकुल भी नहीं हैं। साथ ही साथ, इस बातचीत के बाद फ्रांस के विरोधी जैसे तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों को भी एक कड़ा संदेश गया है।

आतंकवाद और इस्लामिस्ट विचारधारा के खिलाफ लड़ाई की बात करें, तो प्रधानमंत्री मोदी हमेशा से ही पहली कतार में खड़े नज़र आए हैं। PM बनने के बाद उन्होंने UN के मंच पर खड़े होकर भी आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर लड़ाई छेड़ने का अनुरोध किया था। मोदी ने संयुक्त राष्ट्र की सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि “पश्चिम एशिया में कट्टरवाद और फ़ाल्टलाइन बढ़ रहे हैं, और हमारा अपना क्षेत्र भी आतंकवाद के विनाशकारी खतरे का सामना कर रहा है।” उन्होंने अपने सम्बोधन में आगे कहा था कि विश्व के देश आंतरिक राजनीति, आपसी भेदभाव, तथा अच्छे और बुरे आतंकवादियों के बीच भेद कर आतंकवाद के खतरे को नजरंदाज कर रहे हैं। आज जब Macron जमीनी स्तर पर आतंकवाद और कट्टरवाद के खिलाफ लड़ाई छेड़े हुए हैं, तो इसमें भारत का समर्थन मिलना तो लाज़मी है ही। Macron इस बात को भली-भांति जानते हैं और इसीलिए वे अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए PM मोदी से भरपूर समर्थन ले रहे हैं।क

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