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Friday, December 11, 2020

राहुल नहीं शरद पवार बन सकते हैं यूपीए अध्यक्ष, फिर से प्रधानमंत्री बनने के सपनों को लगे पंख


कहते हैं राजनीति में किस्मत कभी भी पलट सकती है और मौके कभी समाप्त नहीं होते हैं। यह कहावत शरद पवार पर फिट बैठने वाली है। एक समय में कांग्रेस अध्यक्ष पद के माध्यम से प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब देखने वाले शरद पवार को एक बार फिर से ऐसा मौका मिल सकता है। परन्तु यह कांग्रेस के अध्यक्ष पद से नहीं, बल्कि UPA के चेयरपर्सन बन कर। 

न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र की राजनीति के मंझे हुए नेता शरद पवार, UPA अध्यक्ष सोनिया गांधी की जगह लेने के लिए अगले यूपीए अध्यक्ष के रूप में नियुक्त होने वाली रेस में सबसे आगे दिखाई दे रहे हैं। 

रिपोर्ट के अनुसार, सोनिया गांधी स्वस्थ्य कारणों से अब इस पद पर नहीं रहना चाहती हैं इसलिए अब इस पद के लिए विकल्प पर कयास लगाया जा रहा है जिसमें पवार के लिए संभावना सबसे अधिक दिखाई दे रही है। 

लोकसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष बनने के लिए मजबूर होना पड़ा। परंतु अब स्वस्थ्य कारणों से न तो वो कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर रहना चाहती हैं और न ही UPA के अध्यक्ष पद पर। 

कांग्रेस ने कई पार्टियों के साथ गठबंधन कर लगभग सभी नेताओं को UPA में शामिल कर आजमा लिया है पर किसी भी नेता में शरद पवार जैसी चतुरता और दुश्मनों को भी दोस्त बनाने की कला नहीं है। हाल के किसान आंदोलन में भी शरद पवार एक प्रमुख विपक्षी नेता के रूप में सामने आए हैं। हालांकि, यह कहा जा सकता है कि वे मराठवाडा के किसानों के हित के कारण आए लेकिन उनके नेतृत्व पर कोई संदेह नहीं कर सकता है। 

क्षेत्रीय नेता जैसे ममता बनर्जी और डीएमके के एमके स्टालिन की अन्य पार्टियों पर उतनी पकड़ नहीं है जितनी शरद पवार की है और वो युवा कांग्रेस नेताओं के साथ बातचीत करने में भी माहिर हैं। ऐसे में पवार ने जिस तरह से महाराष्ट्र में शिव सेना जैसी विरोधी विचारधारा वाली पार्टी के साथ महाविकास आघाडी का गठबंधन किया और उसे चला रहे हैं उससे उनका कद और भी बढ़ चुका है। साथ ही, कांग्रेस कमजोर स्थिति में होने के कारण उनके खिलाफ आवाज उठाने की भी कम ही संभावना है। यानि देखा जाए तो पवार UPA के अध्यक्ष बनने के लिए सबसे प्रबल दावेदार हैं। 

हालांकि, अगर वे UPA के अध्यक्ष बनते हैं तो यह एक विडम्बना ही होगी कि एक समय में सोनिया गांधी के विदेशी होने के कारण आंदोलन कर कांग्रेस से बाहर होने वाले शरद पवार उसी गठबंधन के अध्यक्ष बनेंगे जिसकी सूत्रधार सोनिया गांधी रही हैं। शरद पवार ने कभी पीए संगमा और तारिक अनवर के साथ मिलकर कांग्रेस में सोनिया गांधी का विरोध किया था। इसके बाद पार्टी से बाहर निकलकर 25 मई 1999 को एनसीपी का गठन किया था। आज शरद पवार महाराष्ट्र के सबसे बड़े राजनीतिक किंग मेकर हैं और अगर वे UPA अध्यक्ष बन जाते हैं तो अगले चुनाव में मुख्य नेता के रूप में पीएम मोदी के सामने वही होंगे। ऐसे में एक बार फिर से उनका पुराना घाव ताज़ा होगा और प्रधानमंत्री बनने का सपना जीवित हो जाएगा। पहली बार 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद जब कांग्रेस ने संसदीय दल के नेता का चुनाव हुआ था तब शरद पवार ने अपना पूरा ज़ोर अपने नाम के ऊपर मुहर लगवाने के लिए लगा दिया था। हालांकि, अन्य उम्मीदवार जैसे अर्जुन सिंह और माधव राव को तो उन्होंने राजनीतिक मात दे दी थी लेकिन वाइल्ड कार्ड से एंट्री लेकर पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने उन्हें रेस में पछाड़ दिया था। 

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