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Tuesday, December 8, 2020

नई दिल्ली में हुई गिरफ्तारियों से सामने आया इस्लामवादियों का खालिस्तानियों के साथ सांठगांठ

 


पंजाब-हरियाणा के किसानों ने दिल्ली की सीमाओं में अराजकता मचा दी है, उनकी देखा-देखी दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर भी कुछ किसान जमा हो गए हैं। सभी जानते हैं कि ये आंदोलन प्रायोजित है जिसमें खालिस्तानी समर्थकों से लेकर विदेशी ताकतों तक का हाथ है। इसको लेकर जब भी मीडिया सवाल पूछता है तो उसे सरकार समर्थक समेत गोदी मीडिया की संज्ञा देकर नौटंकी फैला दी जाती है, लेकिन दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने किसान आंदोलन की अराजकता के बीच दिल्ली से ही कुछ सक्रिय आतंकियों को दबोच लिया है। इनके संबंध हिजबुल मुजाहिदीन समेत खालिस्तानी आतंकवादी बब्बर खालसा और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से है।

गिरफ्तार खालिस्तानी आतंकी

दरअसल, दिल्ली के शकरपुर इलाके से पकड़े गए इस्लामिक और खालिस्तानी आतंकियों के संबंध में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के डीसीपी प्रमोद कुशवाहा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें मिली जानकारी के मुताबिक हिजबुल के तीन और दो खालिस्तानी आतंकी बड़ी साजिशों को अंजाम देने की फिराक में थे। इनके नाम शब्बीर अहमद, अयूब पठान, रियाज, गुरजीत सिंह और सुखदीप सिंह हैं। इन सभी आतंकियों के संबंध पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से लेकर खालिस्तानी आतंकी बब्बर खालसा तक से हैं। ये आतंकवाद के प्रति लोगों की नफरत को खौफ में बदलने के लिए लोगों को मारने की प्लानिंग करते थे। ये लोग पंजाब में कुछ लोगों को निशाना बना रहे हैं, साथ ही ये ड्रग्स और पैसों का बखूबी इस्तेमाल भी कर रहे थे। डीसीपी ने बताया, “गैंगस्टर्स का इस्तेमाल टारगेट किलिंग के लिए किया जा रहा है। यह दो उद्देश्यों की पूर्ति करता है- सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा करना और आतंकवाद के खिलाफ खड़े लोगों का मनोबल गिराना। पांच में से दो बलविंदर सिंह की हत्या में शामिल थे। इनके नाम एक गुरजीत सिंह भूरा और सुखदीप है।”

खालिस्तानी आतंकी सक्रिय

एक तरफ जहां दिल्ली में पंजाब के किसानों का संसद द्वारा पारित कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा है तो दूसरी ओर इन आतंकियों का पकड़ा जाना और खासकर खालिस्तानी आतंकियों का पकड़ा जाना एक इत्तफाक ही है। हालांकि, डीसीपी कुशवाहा ने साफ कहा है कि इन आतंकियों का पंजाब के कृषि आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है लेकिन किसानों के आंदोलन पर सवाल उठाता है कि कहीं इस आंदोलन के जरिए देश में अराजकता और आतंकवाद फैलाने की नींव तो नहीं रखी जा रही है। हाल ही में हम आपको बता चुके हैं कि खालिस्तानी संगठन पंजाब, पाकिस्तान, कनाडा और अमेरिका तक में सक्रिय हो गए हैं।

ये बात बिलकुल गलत है कि पंजाब का दिल्ली में आंदोलन कर रहा हर एक किसान आतंकवादी ही है, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि इन्हीं किसानों के बीच कुछ लोग अपना राजनीतिक हित साध रहे हैं; तो कुछ आतंकी संगठन के लोग भी शामिल हो गए हैं जिसके चलते ये आंदोलन असामाजिक तत्वों द्वारा हाईजैक कर लिया गया है। जहां खालिस्तानी समर्थकों के ट्रैक्टर खड़े हैं और एके-47 जैसी खतरनाक बंदूकों और खालिस्तानी आतंकी भिंडरावाले के पोस्टर शान से लगे हुए हैं। इस आंदोलन के बीच से ही इंदिरा की तरह ही मोदी को ठोकने की बात कही जा रही है जो दिखाता है कि अब आंदोलन अराजकता तत्वों के हाथों में जा चुका है।

ये बात अब केवल मीडिया चैनल्स और समाज के लोग ही नहीं, बल्कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी मान रहे हैं कि ये आंदोलन जल्द से जल्द खत्म होना चाहिए क्योंकि इससे देश की आतंरिक सुरक्षा को तगड़ा झटका लग रहा है। इस मसले पर अमरिंदर ने देश के गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी। कैप्टन की आशंकाओं को ही अब ये गिरफ्तार हुए आतंकी हकीकत बनाने में जुटे थे जिन्हें दिल्ली पुलिस ने फिलहाल तो नाकाम कर दिया है लेकिन ये लोग अपनी हरकतों से जल्द ही बाज नहीं इन वाले है जो कि देश के लिए मुश्किलों को न्योता देने वाला होगा।

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