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Friday, December 4, 2020

ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन की चाल पर भारत का वार, घबराया चीन भारत से गुहार लगा रहा


चीन द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाए जाने की खबर के बाद भारत के त्वरित एक्शन से अब चीन बैकफुट पर दिखाई दे रहा है। जैसे ही भारत ने भी बांध बनाने की प्रक्रिया बड़े स्तर पर शुरू की वैसे ही चीन भीगी बिल्ली की तरह भारत से अधिक रिएक्ट न करने की गुहार लगाने लगा। 

दरअसल, सोमवार को, चीनी मीडिया ने बताया कि चीनी सरकार ब्रह्मपुत्र नदी पर 60 गीगावॉट क्षमता तक के डैम का निर्माण कर सकती है। इसके बाद भारत ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ब्रह्मपुत्र नदी पर ही एक 10-गीगावाट (GW) जलविद्युत परियोजना के निर्माण की योजना पर काम शुरू कर दिया जिसके बाद चीन डिफ़ेंसिव मोड में चला गया है। 

SCMP की रिपोर्ट के अनुसार चीन ने कहा है कि भारत के साथ सटे सीमा के पास ब्रह्मपुत्र नदी पर बड़ा बांध बनाने की उसकी योजना अभी प्रारंभिक चरण में है ऐसे में भारत को घबराने की जरूरत नहीं है। 

नई दिल्ली में चीनी दूतावास के प्रवक्ता Ji Rong ने एक बयान में कहा, “कोई भी परियोजना अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम, दोनों क्षेत्रों में स्थित देशों के हितों पर होने वाले प्रभाव पर विचार कर के ही फैसला लिया जाएगा”। 

उन्होंने कहा कि “वर्तमान में, Yarlung Tsangpo नदी पर बनने वाली परियोजना प्रारंभिक चरण में है। इसको over-interpret करने की आवश्यकता नहीं है। “

इससे पहले Reuters ने भारतीय अधिकारी के हवाले से बताया था कि चीन के बांध बनाने के जवाब में भारत भी ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाने जा रहा है। बता दें कि ब्रह्मपुत्र को चीन में यारलुंग त्सांग्पो के नाम से भी जाना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय अधिकारियों को चिंता है कि चीनी परियोजनाएं “फ्लैश फ्लड” को ट्रिगर कर सकती है या पानी की कमी पैदा कर सकती है। यही कारण है कि भारत ने त्वरित कार्रवाई करने का निर्णय लिया है जिसके बाद चीन अब भारत के इस आक्रामक रुख से नरम पड़ता दिखाई दे रहा है। 

पिछले कई महीनों से भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंध हाशिये पर चल रहें हैं और बॉर्डर पर तनाव बढ़ा हुआ है। ऐसे में चीन का अचानक से बांध की खबर के बाद भारत तुरंत एक्शन मोड में आ गया है।

कुछ विश्लेषकों ने चेतावनी दी कि ब्रह्मपुत्र को नुकसान पहुंचाना संभावित रूप से भारत और चीन के बीच एक और तनाव का कारण बन सकता है। अगर पिछले दो दशकों को देखा जाए तो एशिया की बड़ी नदियों पर पनबिजली परियोजनाएं क्षेत्रीय तनावों का एक बड़ा कारण रही हैं। दक्षिण पूर्व एशिया में, चीन ने ऐसी कई परियोजनाओं के जरिये उत्पात मचाया है। उसने मेकांग पर बांध बना कर डाउनस्ट्रीम देशों जैसे लाओस, वियतनाम, कंबोडिया और Thailand में सूखे जैसी स्थिति  पैदा कर दी है। सूखे के कारण इन देशों में किसानों को बड़ी तबाही का सामना करना पड़ रहा है।

अब चीन की नजर भारत के ब्रह्मपुत्र नदी पर है। हालांकि, वह पहले ही कई छोटे-छोटे बांध बना चुका है लेकिन इस बार जो घोषणा हुई है वह चीन के Three George Dam से भी बड़े डैम की है। परंतु भारत ने भी बिना किसी देरी के तुरंत जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी और चीन को वापस डिफ़ेंसिव मोड में जाने के लिए मजबूर कर दिया। चीन ने यह सोचा नहीं होगा कि उसके एक कदम पर भारत इतने बड़े स्तर पर बांध बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर देगा। अब चीन को यह समझ लेना चाहिए कि यह नया भारत है, वो हर हरकत का जवाब देना जानता है। 

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