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Wednesday, December 16, 2020

शरणार्थियों के नाम पर अराजकता फैलने वाले रोहिंग्याओं को बांग्लादेश ने दिखाया बाहर का रास्ता


शरणार्थियों के नाम पर अराजकता फैलाने की समस्या से विश्व के कई देश जूझ रहे है। ऐसे में बांग्लादेश रोहिंग्या शरणार्थियों को देश से निकाल कर एक नए द्वीप पर भेज रहा है क्योंकि ये शरणार्थी लगातार ड्रग्स की तस्करी, अराजकता, आतंकवाद और अपराध को बढ़ावा दे रहे हैं जिसके चलते बंगलादेश की पुलिस अब तक 100 से ज्यादा एनकाउंटर कर चुकी है।

शरणार्थियों के खिलाफ बांग्लादेश की कार्रवाई का यह तरीका विश्व के सभी देशों के लिए एक उदाहरण है कि किस तरह से शरण के नाम पर अराजकता फैलाने वाले असामाजिक तत्वों से निपटा जा सकता है।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2017 से बांग्लादेश की सरकार म्यांमार से आए रोहिंग्या शरणार्थियों को 20 साल पहले खोजे गए समुद्र के बंदरगाह भासन चार द्वीप पर भेज रही है। सरकार ने 13,000 एकड़ के द्वीप पर 22,000 करोड़ रुपए की मदद से राहत शिविर बनाए हैं। हाल ही में चित्तगांग बंदरगाह से 1,642 शरणार्थियों को जबरन यहां भेजा गया है। बांग्लादेश अब रोहिंग्या शरणार्थियों को देश में नहीं रखना चाहता है।

रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश के लिए हमेशा ही मुसीबत का सबब बने रहते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2017 से अब तक आपराधिक गतिविधियों समेत आतंकवाद और ड्रग्स की तस्करी से जुड़े मामलों में 100 से ज्यादा लोगों का बांग्लादेश की पुलिस ने एनकाउंटर किया है।

बांग्लादेश की सरकार समेत वहां के लोगों का यह साफ मानना है कि ये रोहिंग्या शरणार्थी असल में उनके देश में अस्थिरता फैला रहे हैं। सरकार का कहना है कि ये तथाकथित शरणार्थी म्यांमार सीमा से हथियार और ड्रग्स तस्करी सहित हिंसा और बीमारियों का भी विस्तार कर रहे हैं जो कि खतरों का पर्याय है।

इस पूरे मामले को लेकर कई मानवाधिकार संगठन संयुक्त राष्ट्र तक में बांग्लादेश सरकार की आलोचना कर रहे हैं। कुछ लोग तो यह भी कह रहे हैं कि बांग्लादेश नया फिलिस्तीन बन गया है लेकिन बांग्लादेश को किसी भी आलोचना से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।

देश में आपराधिक गतिविधियों और आतंकवाद का गढ़ बनना बांग्लादेश को किसी भी सूरत पर मंजूर नहीं है, जिसका नतीजा यह है कि उसने ऐसे द्वीप को चुना है जहां बाढ़, बारिश का खतरा सबसे अधिक है। इसके बावजूद बांग्लादेश ने शरणार्थियों को वहां भेज दिया है।

बांग्लादेशी पुलिस ने शरणार्थियों के शिविर में जिहादी कट्टरता को रोकने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी है, और उनकी पल-पल की मॉनिटरिंग की जा रही है। इसके लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। साथ ही यहां के प्रशासनिक अमले में किसी भी रोहिंग्या को जगह नहीं दी गई है। इन शरणार्थियों को इंटरनेट की सुविधा समेत सिम कार्ड तक से वंचित रखा गया है, लेकिन सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।

पूरी दुनिया में कई देश ऐसे हैं जो इस वक्त शरणार्थियों की अराजकता से परेशान हैं, ऐसे में अपने देश में जिस तरह से बांग्लादेश ने कार्रवाई की है वह अन्य देशों के लिए एक उदाहरण है कि अराजकता फैलाने वाले शरणार्थियों से कैसे निपटना चाहिए।

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