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Thursday, December 3, 2020

फतवा से समर्थन: शरीयत की नजर में लव जेहाद की कोई हैसियत नहीं

 

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लखनऊ। लव जेहाद के खिलाफ सख्ती का असर अब दिखने लगा है। उत्तर प्रदेश में लव जेहाद रोकने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से लाए गए विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश के कानून बनने के साथ ही कार्रवाई शुरू हो चुकी है। मुकदमों की बढ़ती संख्या के बीच बरेली के दरगाह आला हजरत ने फतवा देकर लालच, जबरन तरीके से धर्म परिवर्तन कराने को गैर इस्लामिक करार दिया है। राष्ट्रीय सुन्नी उलेमा काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना इंतजार अहमद कादरी ने बरेली के दरगाह आला हजरत परिसर में बने मरकज-ए-दारुल इफ्ता से सवाल पूछा था कि, ‘क्या कोई मुस्लिम लड़का किसी गैर मुस्लिम लड़की से शादी करने के लिए फरेब यानी धोखाधड़ी कर के उसका मजहब बदलवा सकता है? इसके अलावा क्या शरीयत में लव जिहाद का कोई वजूद है? इस सवाल का जवाब देते हुए दारुल इफ्ता के अध्यक्ष मुफ्ती मुसीबुर्रहमान रजवी ने फतवा जारी किया है। रजवी ने लव जेहाद पर कहा कि इस्लाम में ऐसी किसी चीज की कोई जगह नहीं है। यह सामाजिक बुराई है जो पश्चिमी सभ्यता से फैली है। लव अंग्रेजी शब्द है जबकि जेहाद अरबी का शब्द है। इनका एक दूसरे से कोई संबंध नहीं है। शरीयत की नजर में लव जेहाद की कोई हैसियत नहीं है।

उन्होंने लव जेहाद को पूरी तरह से इनकार कर दिया। ज्ञात हो कि सुन्नी मुस्लिमों में देवबंदी और बरेलवी नाम के दो फिरके हैं। इनमें देवबंदियों को ज्यादा कट्टर माना जाता है और वे मजार-दरगाह की इबादत करने या संगीत सुनने को गैर इस्लामिक मानते हैं। वहीं बरेलवी मसलक से जुड़े सुन्नी मुस्लिम मजार-दरगाह की इबादत करने के साथ ही संगीत से भी जुड़े होते हैं। इस मसलक का दुनिया में सबसे बड़ा केंद्र बरेली की आला हजरत दरगाह है। लव जेहाद पर बरेलवी आला हजरत दरगाह के इस फतवे को अप्रत्यक्ष रूप से योगी सरकार का समर्थन माना जा रहा है।

इस फतवे से एक बात तो तय हो गयी है कि लव जेहाद के समर्थन में कोई आने की हिम्मत नहीं करेगा। योगी सरकार ने नाम-पहचान छुपाकर या जबरन व लालच देकर धर्मांतरण के खिलाफ पिछले दिनों विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश जारी किया था। जिसके बाद यूपी में नए कानून के तहत दो मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। इस कानून में जबरन धर्मांतरण पर 50 हजार रुपये तक जुर्माना और 10 साल तक सजा का प्रावधान है।

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