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Saturday, December 5, 2020

नस्लवाद का शिकार हुए थे चेतेश्वर पुजारा, तंग आकर जान देना चाहता था ये दिग्गज!

 

नस्लवाद का शिकार हुए थे चेतेश्वर पुजारा, तंग आकर जान देना चाहता था ये दिग्गज!

काउंटी क्रिकेट की बड़ी टीम यॉर्कशर के लिये मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही है, टीम पर नस्लवाद के गंभीर आरोप लग रहे हैं, इस बीच यॉर्कशर के पूर्व कर्मचारियों ने भी क्रिकेटर अजीम रफीक के दावों का समर्थन करते हुए टीम की मुश्किलें बढा दी है, पूर्व कर्मचारियों ने खुलासा किया है कि टीम इंडिया के बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा को भी एशियाई होने तथा चमड़ी के रंग के कारण स्टीव बुलाया जाता था।

आरोपों की जांच
वेस्टइंडीज के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी टीनो बेस्ट और पाक के राणा नावेद उल हसन ने रफीक के आरोपों का समर्थन करते हुए सबूत पेश किये हैं, cricketउनके आरोपों की जांच चल रही है, क्रिकइंफो के मुताबिक यॉर्कशर के दो पूर्व कर्मचारी ताज बट और टोनी बाउरी ने क्लब में संस्थागत नस्लवाद के खिलाफ सबूत पेश किये हैं, यॉर्कशर क्रिकेट फाउंडेशन के साथ सामुदायिक विकास अधिकारी के तौर पर काम कर चुके बट ने कहा कि एशियाआ समुदाय का जिक्र करते समय बार-बार टैक्सी चालकों और रेस्तरां का काम करने वालों का हवाला दिया जाता था।

पुजारा के नाम का नहीं कर पाते थे उच्चारण
उन्होने बताया कि एशियाई मूल के हर व्यक्ति को वो स्टीव बुलाते थे, भारतीय बल्लेबाज पुजारा को भी स्टीव कहा जाता था, क्योंकि वो उनके नाम का उच्चारण नहीं कर पाते थे, बट ने 6 महीने के भीतर ही इस्तीफा दे दिया था, बाउरी 1996 तक कोच के रुप में काम करते थे, फिर 1996 से 2011 तक यॉर्कशर क्रिकेट बोर्ड में सांस्कृतिक विविधता अधिकारी रहे, फिर उन्होने अश्वेत समुदायों में खेल के विकास के लिये क्रिकेट विकास प्रबंधक बना दिया गया।

सामंजस्य बिठाने में परेशानी
उन्होने कहा कि कई युवाओं को ड्रेसिंग रुम के माहौल में सामंजस्य बिठाने में दिक्कत हुई, क्योंकि उन पर नस्लवादी टिप्पणियां की जाती थी, cricket news3इसका असर उनके प्रदर्शन पर पड़ा, और उन पर परेशानियां खड़ी करने के आरोप लगाये गये, दो साल पहले यॉर्कशर काउंटी छोड़ने वाले रफीक ने तो यहां तक कह दिया, कि इस कड़वे अनुभव से परेशान होकर उन्होने सुसाइड करने तक की सोच ली थी।

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