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Thursday, December 10, 2020

किसान किसके साथ हैं बीजेपी या कांग्रेस? इसका जवाब राजस्थान चुनाव के नतीजों में छुपा है


 कृषि बिलों से संबंधित मुद्दों को लेकर राजनीतिक पार्टियों ने अपनी दुकान लगा ली है। सभी को पता है कि किसान आंदोलन के पीछे पंजाब कांग्रेस का हाथ है। कांग्रेस सबसे ज्यादा मोदी सरकार पर आक्रामक है, लेकिन कांग्रेस को किसानों ने ही झटका दे दिया है। पंजाब के ही पड़ोसी राज्य राजस्थान में आए पंचायत चुनावों के परिणाम कांग्रेस को बैकफुट पर ले आए हैं क्योंकि यहां भाजपा के हाथों  कांग्रेस की करारी हार हुई है, जो दिखाता है कि कांग्रेस की नीयत को किसानों ने अच्छे से समझा है, इसलिए वो कांग्रेस को लताड़ने में गुरेज नहीं कर रहे हैं।

राजस्थान में कांग्रेस शासित सरकार है, वहां के जिला परिषद और पंचायत चुनावों के नतीजों ने एक बार फिर कांग्रेस को हार ही दी है। नतीजों की बात करें तो 21 जिलों में 636 जिला परिषद सीटों में से 635 के नतीजे आ चुके हैं और 222 पंचायत समितियों के लिए 4371 सदस्यों का रिजल्ट आ चुका है, जिनमें भाजपा को दोनों ही चुनावों में बढ़त मिली है। जिला परिषद की 353 और पंचायत समिति की 1989 सीटों पर भाजपा की जीत हुई है। 21 जिला परिषदों में चुनाव हुआ, जिसमें से 14 में भाजपा को बहुमत मिला है और कांग्रेस को केवल 5 में बहुमत मिला है। ये सारी खबरें कांग्रेस के लिए दुखदाई ही हैं।

पंचायत और जिला परिषद के चुनावों में करीब 2.5 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया जिसमें बड़ी संख्या किसानों की भी थी। ये नतीजे किसानों के मोदी सरकार के प्रति समर्थन को दिखाता है क्योंकि इस मुद्दे को लेकर लगातार राजनीति ही हो रही है। जीत के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, “राजस्थान के चुनाव में इस बार हार जीत का अंतर बहुत ज्यादा रहा। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अपने गृह क्षेत्र में दो पंचायत समिति पूरी तरह हार गए। पायलट के गृह जिले टोंक में जिला परिषद भाजपा ने जीती है।” उन्होंने कहा“इन चुनावों में 2.5 करोड़ वोटरों में से अधिकतर किसान हैंइसका मतलब है कि किसान राजस्थान में कृषि सुधारों और कृषि बिलों के पक्ष में हैं। जो कि प्रतीत भी होता है।”

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार भाजपा के हारने के दावे करने के साथ ही अपने कार्यों का बखान करते नजर आएं हैं जो कि उनके आत्मविश्वास को दिखाता है लेकिन नतीजों ने उनके सारे दावों की हवा निकाल दी है। दूसरी ओर कांग्रेस की राष्ट्रीय ईकाई, जो कृषि कानूनों के मुद्दों पर पंजाब के किसानों को भ्रमित करके आंदोलन को प्रायोजित कर रही है, उसकी मंशाओं को इन किसानों से ही झटका मिल गया है क्योंकि पंचायत के चुनावों में कांग्रेस की हार बताती है कि कांग्रेस को किसानों का समर्थन शून्य है।

देश के अन्य राज्यों का हाल भी कुछ ऐसा ही है जहां के किसान कृषि कार्यों में जुटे हुए हैं तो पंजाब और हरियाणा के कुछ किसान राजनीतिक दलों के झूठ के कारण आंदोलन करके खुद भी ठंड में परेशान हो रहें हैं और देश में माहौल खराब कर रहे हैं क्योंकि इस आंदोलन को भी खालिस्तानी समर्थकों और अराजक तत्वों ने ही हाईजैक कर लिया है, जो कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा है।

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