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Sunday, December 20, 2020

‘कृषि कानून का समर्थन करने वाले नहीं हैं असली सिख’, उत्तराखंड की एक सिख संस्था अब सर्टिफिकेट बाँटने लगी है

 


कृषि कानूनों को लेकर चल रहे किसानों के आंदोलन में हर दिन एक नया ही रंग देखने को मिल रहा है। देश की संसद द्वारा पारित कानून का विरोध करने के साथ ही अब ये अराजक लोग समुदाय से बहिष्कार का खेल भी खेलने लगे हैं। उत्तराखंड के सिख समुदाय द्वारा एलान किया गया है जो सिख इस कानून को समर्थन देंगे उनका सिख समाज से बहिष्कार कर दिया जाएगा। अपनी आंखों में राजनीतिक एजेंडों की पट्टी बांधे ये लोग इतने ज्यादा अंधविश्वासी हो गए हैं कि सिखों में भी बंटवारे का धार्मिक खेल कर रहे हैं।

दरअसल, उत्तराखंड में रहने वाले सिख समुदाय द्वारा कहा गया है कि उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के जो सिख इस केंद्र द्वारा पारित कानून का समर्थन करेंगे उनका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। इसके साथ ही ये आह्वान भी किया गया है कि सिखों के नौवें गुरु की शहादत की वर्षगांठ के दिन को मनाने के लिए 19 दिसंबर को दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचें।

उत्तराखंड और यूपी सिख संगठन के अध्यक्ष जसवीर सिंह विर्क ने गुरुवार को दिल्ली-हरियाणा सीमा विरोध स्थल पर टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, “शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डेय कुछ सिख लोगों के साथ कृषि मंत्री से मिलने और कृषि कानून पर समर्थन जाहिर करने गए थे। उन लोगों को तो ढंग से पगड़ी भी पहनना भी नहीं आ रहा था जो कि टेढ़ी लगी थी।” यही नहीं इन्होंने अब उन लोगों को किसान मानने से इनकार कर दिया है।

कृषि कानूनों का समर्थन करने वाले किसानों का हर स्तर पर विरो़ध किया है। कृषि आंदोलन को लेकर लगातार दिल्ली में प्रदर्शन उग्र होता जा रहा है। इस प्रदर्शन में साफ दिख रहा है कि कुछ अराजक तत्वों ने इसे हाईजैक किया है और खालिस्तानी समर्थकों द्वारा इसमें लगातार अराजकता फैलाई जा रही है।

ऐसे में जिस तरह से सिख समुदाय के कुछ लोगों द्वारा कृषि कानूनों का समर्थन करने वाले सिख किसानों को समुदाय का बहिष्कार करने की धमकी सामने आई है ये दिखाता है कि ये कृषि कानूनों का विरोध असल में राजनीति से प्रेरित है, जबकि पूरे देश में इन कृषि कानूनो का समर्थन किया जा रहा है। हर दिन हज़ारों किसान केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिल रहे हैं और यही बात इन लोगों को चुभ रही है।

सिख समुदाय का नाम लेकर असल में अब इन अराजक लोगों इस आंदोलन को सांप्रदायिक बना दिया है, जो ये दिखाता है कि यही लोग कल खालिस्तानी समर्थन की बात भी करते है। इसलिए ये बेहद ही शर्मनाक बात है। इसी को देखते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने खालिस्तानी समर्थकों की फंडिंग की जांच का पूरा इंतजाम कर लिया है जिससे इन लोगों को सटीक सबक सिखाया जा सके।

कृषि कानूनों का असर किसी भी धर्म या किसी जाति पर एक समान ही होगा। ऐसे में सिख धर्म की विशेष बात करके सिख धर्म के कथित झंडाबरदारों ने असल में खुद की बट नियति जाहिर की है जो उन पर भारी पड़ने वाली है।

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