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Saturday, December 26, 2020

‘बिहार में रहो, हमारे मामले में मत पड़ो’, अरुणाचल प्रदेश के जरिए BJP ने अब JDU को दे दिया है अपनी हद में रहने का संदेश


बिहार की राजनीति में बीजेपी के समर्थन से एनडीए की सरकार चलती है, जिसके मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं, लेकिन नीतीश का मकसद हमेशा ही बीजेपी के लिए अन्य राज्यों में मुसीबत खड़ी करने का रहा है। ऐसे में बीजेपी ने अरुणाचल प्रदेश के 6 जेडीयू विधायकों को पहली बार तोड़कर जेडीयू को एक कड़ा संदेश दिया है कि जेडीयू बिहार तक ही सीमित रहे, अन्य राज्यों में बीजेपी के लिए मुसीबत न बने वरना परिणाम बुरे होंगे, और रिश्तो में भी खटास आएगी।

अरुणाचल में बीजेपी ने जेडीयू के 6 विधायकों को अपनी ही पार्टी में शामिल कर लिया गया है। इन विधायकों में रमगोंग विधानसभा क्षेत्र के तालीम तबोह, चायांग्ताजो के हेयेंग मंग्फी, ताली के जिकके ताको, कलाक्तंग के दोरजी वांग्दी खर्मा, बोमडिला के डोंगरू सियनग्जू और मारियांग-गेकु निर्वाचन क्षेत्र के कांगगोंग टाकू भाजपा में शामिल हो गए हैं। जदयू ने 26 नवंबर को सियनग्जू, खर्मा और टाकू को “पार्टी विरोधी” गतिविधियों के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया था और उन्हें निलंबित किया गया था।

खास बात ये है कि जेडीयू पिछले काफी वर्षों से पार्टी के विस्तारीकरण में लगी हुई है, और इसीलिए अरुणाचल के चुनावों में उसे अच्छी खासी बढ़त के साथ 7 सीटें मिली थीं। वो मुख्य विपक्षी दल बन गया था। ऐसे में इन विधायकों का बीजेपी में जाना जेडीयू के लिए एक झटका है। जल्द ही जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होनी है। इससे ठीक पहले जेडीयू को लगा ये झटका खतरनाक था। हालांकि नीतीश कुमार ने ये जाहिर किया है कि उन्हें फर्क नहीं पड़ा। उन्होंने कहा, “हमारा ध्यान पार्टी की प्रस्तावित बैठक पर केंद्रित है। वह अपने रास्ते चले गए हैं।”

नीतीश कुमार के सामने मजबूरी है वो इसके अलावा कुछ और बोलें भी तो क्या, क्योंकि ये उनकी ही लगाई आग है जो अब उनको जला रही है। नीतीश की पार्टी जेडीयू लगातार झारखंड से लेकर छत्तीसगढ़, कभी गुजरात, कभी जम्मू-कश्मीर और कभी अरुणाचल और असम में चुनाव लड़कर बीजेपी का वोट बैंक काटती हैं। खास बात ये है कि इससे राज्य की राजनीति में तो कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता है। जेडीयू के विधायक उसी तरफ चले जाते है जिसके पास सत्ता होती है, लेकिन मुसीबतें बीजेपी को होती हैं।

जेडीयू अपने जनाधार के विस्तारीकरण के नाम बीजेपी की जड़ों को काटती है। कुछ ऐसा ही जेडीयू पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में करने की कोशिश में है। बीजेपी लंबे वक्त से वहां अपने लिए राजनीति जमीन तैयार कर रही है, लेकिन अंत समय में जेडीयू वहां लड़ने की तैयारी कर रही है जो कि बीजेपी को अच्छा नहीं लगा है। अरुणाचल की राजनीति से इतर बीजेपी ने 6 विधायकों को तोड़ कर जेडीयू को एक कड़ा संदेश भी दिया हैं कि गठबंधन केवल बिहार तक है और जेडीयू वहां अपना शासन चलाए लेकिन यदि देश के अन्य राज्यों में बीजेपी का रास्ता रोकने की कोशिशें की जाएंगी; तो परिणाम कुछ ऐसे ही होंगे।

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