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05 November 2020

आदित्य ठाकरे vs अर्नब: अदित्य ठाकरे पर की गयी रिपोर्टिंग की कीमत चुका रहे हैं अर्नब गोस्वामी

 


रिपब्लिक टीवी के पत्रकार अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी को लेकर देश में बहस छिड़ गई है कि कैसे इतने बड़े वरिष्ठ पत्रकार को मुंबई पुलिस ने  एक बंद पड़े केस में गिरफ्तार कर लिया। अर्नब की गिरफ्तारी के बाद आदित्य ठाकरे पर भी सवाल खड़े हो गए हैं जिनके खिलाफ अर्नब ने खूब कवरेज की थी, ऐसे में संभावनाएं हैं कि इसी के बदले के लिए आदित्य ठाकरे अब अर्नब को निशाने पर ले रहे हैं और उन्होंने सत्ता का फायदा उठाकर सारा प्रशासन अर्नब के पीछे लगा दिया है।

महाराष्ट्र में बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से रिपब्लिक टीवी और उसके एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी ने महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस की कार्यपद्धति पर सवाल खड़े कर दिए थे। सुशांत की मौत के एक हफ्ते पहले ही उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान ने भी आत्महत्या की थी और उस आत्महत्या को लेकर कहा गया कि आत्महत्या के दौरान आदित्य ठाकरे भी उसी बिल्डिंग में थे।

इस पूरे वाकये के बाद मीडिया ने काफी रिपोर्टिंग की और आदित्य ठाकरे पर सवाल खड़े किए। इनमें अर्नब गोस्वामी सबसे आगे थे। खास बात ये थी कि वो प्रतिदिन प्राइम टाइम डिबेट में किसी एक नए तथ्य के साथ सामने आते थे जो आदित्य ठाकरे के खिलाफ होते थे। इस स्थिति में आदित्य ठाकरे को लगतार अर्नब द्वारा चुनौती मिल रही थी कि वो सामने आकर बोलें।

अर्नब द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवालों का ही नतीजा था कि आदित्य को मीडिया में आकर सफाई देनी पड़ी। इसके बावजूद अर्नब लगातार आदित्य के खिलाफ एक सघन जांच की मांग करते रहे। ऐसे में एक वक्त ऐसा भी आया जब अर्नब के रिपब्लिक टीवी के दो पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया जिसके चलते अर्नब ने महाराष्ट्र सरकार को ही निशाने पर ले लिया और साफ धमकी दे दी कि अगर उनके पत्रकारों को नहीं छोड़ा गया तो उन्हें कानूनी लड़ाई के लिए तैयार रहना होगा।

ये सभी ऐसे मामले हैं जिनके चलते अर्नब और आदित्य ठाकरे समेत महाराष्ट्र सरकार के बीच तल्खी बढ़ गई और लगातार महाराष्ट्र सरकार अर्नब के रिपब्लिक टीवी के पीछे पड़ी है। पहले पालघर हिंसा के बाद सोनिया गांधी के नाम के मामले में अर्नब से 12-12 घंटे पूछताछ की गई इसके बाद उनके मैनेजेर को भी परेशान किया गया।

अर्नब से तल्खी में मुंबई पुलिस ने एफआईआर में नाम ने होने के बावजूद टीआरपी कांड के एक झूठे केस में रिपब्लिक को फंसा दिया, जिसको लेकर ये कहा गया कि अर्नब के चैनल ने पैसे बांटकर टीआरपी पाई है। इस मामले में पुलिस ने चैनल के करीब 1,000 पत्रकारों पर केस भी दर्ज कर दिया। महाराष्ट्र सरकार में बैठे लोगों का इतना बड़ा दबाव पुलिस पर था कि वो चैनल के 3 साल पुराने वित्तीय दस्तावेज चेक करने लगी जो साफ दिखाता है कि सारा केस केवल और केवल दबाव के तहत दर्ज किया गया।

अर्नब के चैनल रिपब्लिक द्वारा भी यही कहा जा रहा है कि अर्नब पर लगाए गए सभी तरह के आरोप केवल बदले की नीति से ही दर्ज किए गए हैं जो दिखाता है कि पिछले पांच महीनों से जिस तरह से अर्नब ने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ रिपोर्टिंग की है उससे महाराष्ट्र सरकार और आदित्य ठाकरे काफी नाराज हैं। इसलिए अब आदित्य ठाकरे की देख-रेख में अर्नब के खिलाफ मुंबई पुलिस कार्रवाई कर रही है, जो कि शर्मनाक है।

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