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22 November 2020

चीन हुवावे की CFO को वापस लाने की उम्मीद लगभाग छोड़ चुका था, अब बाइडन की एंट्री ने उसे नई उम्मीद दी है

 


हुवावे की CFO मेंग वानझोउ को कनाडा में वर्ष 2018 से ही गिरफ्तार किया हुआ है। इतना ही नहीं, अब कनाडा मेंग वानझोउ को अमेरिका को प्रत्यर्पित करने की तैयारी भी कर रहा है। पिछले दो सालों में चीन ने मेंग को रिहा कराने की भरपूर कोशिश की, लेकिन वह नाकाम साबित रहा है। हालांकि, अब बाइडन के आने के बाद चीनी प्रशासन में मेंग को लेकर एक बार फिर उम्मीद जगी है। चीन ने मेंग को वापस चीन को लौटाने का आह्वान किया है और उम्मीद जताई है कि कनाडा ऐसा करके चीन-कनाडा के सम्बन्धों को दुरुस्त करने की कोशिश करेगा।

मेंग वानझोउ को वापस लेने के लिए चीन इतना बेताब है कि उसने अब चीन में कैद किए गए दो कनाडाई पूर्व राजदूतों को Consular access भी प्रदान कर दिया है। यह consular access 10 और 19 नवंबर को प्रदान किया गया था, और चीन में तैनात कनाडाई राजदूत ने कैद किए गए पूर्व राजदूतों से virtually मुलाक़ात की। अब चीनी मुखपत्र Global Times ने एक लेख के माध्यम से कनाडाई सरकार से यह आग्रह किया है कि उसे चीनी सरकार की भांति कनाडा-चीन के रिश्ते सुधारने के लिए मेंग को वापस चीन भेज देना चाहिए।

Global Times ने अपने एक लेख में लिखा “इस साल कनाडा-चीन के कूटनीतिक रिश्तों के स्थापना की 50वीं सालगिरह है। इन सालों में हमने अपने व्यापारिक रिश्तों को नया आयाम दिया है। सिर्फ एक मेंग वानझोउ के कारण चीन-कनाडा के रिश्तों की बलि नहीं दी जा सकती। कनाडा को जल्द से जल्द अपनी गलती सुधारने के लिए प्रयास करने चाहिए।” चीन की भाषा से यह स्पष्ट है कि वह मेंग की रिहाई को लेकर हताश है, और उसे बाइडन के आने के बाद एक नई उम्मीद की किरण नज़र आ रही है।

हालांकि, बाइडन के आने के बाद क्या चीन और मेंग वानझोउ को कोई राहत मिलेगी? इसके आसार कम ही नज़र आ रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि दो दिन पहले ही कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने मेंग की गिरफ्तारी का बचाव किया था, और साथ ही पूरी दुनिया से चीन के खिलाफ एकजुट होने की अपील की थी।

मेंग वानझोउ कोई छोटी-मोटी हस्ती नहीं है। वह हुवावे के CEO की बेटी के साथ-साथ कंपनी की CFO भी है, और ऐसे में वर्ष 2018 में उनकी गिरफ्तारी के बाद से ही चीन कनाडा के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है, लेकिन अब तक उसका कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। बाइडन के आने के बाद बेशक चीन को उम्मीद की एक नई किरण दिखाई दी हो, लेकिन सच यह है कि चीन को इस मामले पर कोई राहत निकट भविष्य में नहीं मिलने वाली है।

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