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12 November 2020

बिहार चुनाव के इकलौते निर्दलीय विजेता, विधायक भाई ने पत्नी और बेटी को मारकर खुद दी थी जान!

 

बिहार चुनाव के इकलौते निर्दलीय विजेता, विधायक भाई ने पत्नी और बेटी को मारकर खुद दी थी जान!

बिहार में एनडीए ने 125 सीटों के साथ बहुमत का जादूई आंकड़ा हासिल कर लिया है, यहां महागठबंधन और एनडीए के अलावा 8 अन्य लोगों की जीत हुई है, जिसमें सिर्फ एक ही निर्दलीय है, सुमित कुमार सिंह बिहार के अकेले निर्दलीय प्रत्यासी हैं, जिन्होने जीत हासिल की है, 39 वर्षीय सुमित ने चकाई विधानसभा सीट से चुनाव जीत है, उन्होने राजद की पूर्व विधायक सावित्री देवी को 581 वोटों से हराया है।

राजनीति से जुड़ा है परिवार
सुमित सिंह का परिवार राजनीति से जुड़ा रहा है, उनके दादा श्रीकृष्णानंद सिंह दो बार चकाई से जीतकर विधायक रह चुके हैं, उन्होने साल 1967 और 1969 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से जीत हासिल की थी, तमाम निजी तथा पारिवारिक संकटों के बाद भी सुमित को इस साल सफलता मिली, उनके भाई अभय सिंह भी विधायक रह चुके हैं, 2010 में पारिवारिक विवाद की वजह से अपनी पत्नी और बेटी की हत्या करने के बाद उन्होने सुसाइड कर लिया था।

आदिवासी बहुल इलाका
चकाई विधानसभा सीट पर पहले चरण के मतदान पर सबसे ज्यादा 60 फीसदी वोटिंग हुई थी, ये आदिवासी बहुल इलाका है, यहां से 13 उम्मीदवार मैदान में थे, सुमित को 45,548 वोट मिले, जबकि राजद प्रत्याशी को 44957 वोट हासिल हुए, तीसरे स्थान पर जदयू के संजय प्रसाद रहे, जिन्हें 39319 वोटों से ही संतोष करना पड़ा, यहां पर लोजपा ने जदयू का वोट काटने का काम किया।

मेरा कोई काडर नहीं
सुमित सिंह ने कहा कि मैंने इसलिये निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया, क्योंकि मेरा कोई काडर नहीं है, मैंने लोगों की मदद करके ही अपना वोट बैंक तैयार किया है, जदयू से टिकट ना मिलने के बाद सुमित ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला लिया, उनके परिवार का आदिवासियों पर अच्छी पकड़ रही है, एक स्थानीय वोटर ने बताया कि उनका परिवार आदिवासियों की मदद के लिये तैयार रहता है, उनका इलाज करता है, साथ ही इंदिरा आवास योजना के तहत कई लोगों को घर दिलाने में भी मदद की, 2015 में वो चुनाव हार गये थे, लेकिन इसके बाद भी लोग उनके पास अपनी समस्याएं लेकर आते थे, वो उन्हें सुनते थे। 2010 में सुमित सिंह ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी।

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