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04 November 2020

‘दान गुप्त होना चाहिए और समाजवादी व्यवस्था में बिचौलिये राजा हो जाते हैं’, ‘बाबा का ढाबा’ प्रकरण से ये दो चीज़ें साबित होती हैं


आज के दौर में एक चलन बन गया है “नेकी कर… सोशल मीडिया पर डाल।” लोग कोई भी अच्छा काम करते हैं तो उससे जुड़े फोटोज और वीडियोज सोशल मीडिया पर डाल देते हैं लेकिन कभी-कभी ये करना भारी भी पड़ सकता है। कुछ ऐसा ही बाबा का ढाबा यू-ट्यूब पर दिखाने वाले गौरव वासन के साथ है। उन्होंने  बाबा की मदद और अपने फॉलोअर्स बढ़ाने की नीयत से एक वीडियो बनाया लेकिन वो अब उस यू-ट्यूबर के लिए ही बदनामी का सबब बन गया है और मामला कोर्ट केस तक पहुंच गया है। इस मामले में एक बार फिर सबक दे दिया है कि दान छिपाकर ही करना चाहिए, डंका पीटकर नहीं।

दरअसल, यू-ट्यूबर गौरव वासन ने दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर में रहने वाले बाबा का ढाबा नामक भोजनालय का प्रमोशन किया उनकी कुछ मदद भी की और लोगों से भी मदद के लिए कहा। देश की जनता तो भावुक है ही वो भी यू-ट्यूबर के अकाउंट में धड़ाधड़ पैसा भेजने लगी लेकिन इसके साथ ही पैसों को लेकर विवाद हो गया। भोजनालय के मालिक कांता प्रसाद ने आरोप लगाया है कि उन्हें गौरव ने पूरी रकम नहीं दी है। ये विवाद बढ़ता रहा और अब यू-ट्यूबर ने अपने बैंक स्टेटमेंट सार्वजनिक करते हुए भोजनालय के मालिक के खिलाफ मानहानि का मुकदमा कर दिया है।

एक तरफ यू-ट्यूबर बाबा पर आक्रामक है तो दूसरी ओर उन पर भी आरोप हैं कि उन्होंने इस वीडियो के चलते अपने सब्सक्राइबर्स की संख्या में इजाफा पाया है और उन्होंने इस बुजुर्ग के साथ धोखा करते हुए उनके हिस्से की रकम भी हड़प ली है। इस पूरे मामले में ये विवाद रोचक होता जा रहा है तो दूसरी ओर ये एक ऐसा सबक भी दे रहा है जो आज के दौर में हम सभी पूरी तरह भूल चुके हैं।

हमारी संस्कृति है कि दान देते समय उसका दिखावा नहीं करना चाहिए क्योंकि ये गुप्त ही रखा जाता है लेकिन इस यू-ट्यूबर ने ठीक उल्टा ही किया है। उसने तो प्रसिद्धि और फॉलोअर्स बढ़ाने लिए अपने दान देने का एक ढोल पीट दिया, और अब ये उसे ही भारी पड़ गया है। यू-ट्यूबर की चारों तरफ पैसे हड़पने को लेकर निंदा ही हो रही है।

कई बार देखा गया है कि देश में प्राकृतिक आपदा के दौर में सोशल मीडिया पर एक कैंपेन चला और उसके जरिए खूब डोनेशन जमा किया गया, लेकिन वो डोनेशन और पैसों की मदद जरूरतमंद व्यक्ति तक नहीं पहुंची और जब उस पर जांच हुई तो वो मात्र एक घोटाला निकला और कई बार तो इन घोटालों के आरोपी भी पकड़ में नहीं आ सके।

बाबा का ढाबा के इस कांड ने एक बार फिर ये सबक दिया है कि दान का प्रचार-प्रसार नहीं होना चाहिए और सनातन धर्म की वो पद्धति सबसे बेहतरीन हैं जिसमें कहा गया है, दान ऐसे देना चाहिए कि एक हाथ के दान देने की भनक दूसरे हाथ को भी न लगे।

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