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02 November 2020

करवा चौथ के दिन करें इन नियमों का पालन, मिलेगा सौभाग्य और सुहागन होने का आशीर्वाद

Karwa Chauth 2020

 करवाचौथ का त्योहार के लिए अब बस कुछ ही दिन बचे हैं। हिन्दू धर्म के मुताबिक करवाचौथ सुहागन औरतों के लिए बेहद ही महत्त्वपूर्ण होता है। यह प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। अर्थात करवाचौथ का पर्व दिवाली के 10 या 11दिन के पहले पड़ता है। करवा चौथ का व्रत महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। इस दिन महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखती है। मान्यता है कि जो महिलाएं सच्चे मन से करवा चौथ का व्रत रखती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद भगवान से मिलता है।

इस बार करवा चौथ शुभ मुहूर्त 4 नवंबर (बुधवार) को शाम 05 बजकर 34 मिनट से शाम 06 बजकर 52 मिनट तक। जबकि चंद्रोदय शाम 7 बजकर 57 मिनट पर होगा। हालांकि जगह के हिसाब से ये चंद्रोदय का समय आगे पीछे हो सकता है। करवा चौथ के दिन महिला रात को चांद देखने के बाद ही खाना खाती हैं। ये व्रत बहुत कठिन होता है। इस व्रत में कई नियम भी हैं। जो महिलाएं इन नियमों का पालन नहीं करती हैं, उनका ये व्रत कभी सफल नहीं होता है। इसलिए आप आगे बताए गए नियमों का पालन अवश्य करें जिससे आपका ये व्रत सफल रहे हैं।

  • रखें इन बातों का ध्यान
    करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं को इस दिन कैंची और चाकू का प्रयोग नहीं करना चाहिए और ना ही किसी लोहे की वस्तु को छूना चाहिए।
  • नाखून न काटे। ऐसा माना जाता हैं कि जो महिलाएं ऐसा करती हैं उनके व्रत सफल नहीं होता है।
    आप सूर्योदय के बाद भोजन ग्रहण ना करें। जो महिलाएं ये व्रत करती हैं वो सूर्योदय से पहले उठकर सरगी खा सकती हैं।
  • सरगी में सिर्फ मीठी चीज का ही सेवन करना चाहिए। नमक व खट्टी चीज खाने से बचें। इसके अलावा ये भी ध्यान रखें की सरगी खाते वक्त मुंह की दक्षिण पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए।
  • व्रत वाले दिन काले, नीले और सफेद रंग के कपड़े कभी न पहने। इस दिन लाल, गुलाब, पीले या फिर हरे रंग के कपड़े ही पहनें।
  • इस दिन बिंदी, चूड़ियां और सिंदूर अवश्य लगाएं। इस दिन अच्छे से श्रृंगार करने का रिवाज है।
    चांद देखने के बाद अपने पति के हाथ से पानी अवश्य पीएं और उसके बाद ही भोजन ग्रहण करें। भोजन में चावल और दाल का ही सेवन करें।
  • चांद देखने के बाद मां गौरी की पूजा भी करें और भगवान को भी अवश्य भोग लगाएं।
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