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19 November 2020

सौहार्द्र के चूल्हे पर पकता है महापर्व का महाभोग, कासिम-नूरजहां ने कट्टर सोच को दिखाया आईना!

  

सौहार्द्र के चूल्हे पर पकता है महापर्व का महाभोग, कासिम-नूरजहां ने कट्टर सोच को दिखाया आईना!

बांग्लादेश के पूर्व कप्तान तथा स्टार क्रिकेटर शाकिब अल हसन हाल ही में काली पूजा में शामिल होने कोलकाता पहुंचे थे, इसी का वीडियो अब उन्होने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट किया है, तो तलवार लहराते हुए एक शख्स ने जान से मारने की धमकी दी है, इसके बाद शाकिब ने अब इस पूरे मामले पर माफी मांगी है, और कहा है कि मुझे पूजा के लिये नहीं जाना चाहिये था, हालांकि धमकी देने वाले शख्स मोहसिन तालुकदार को बांग्लादेश की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन इसके साथ ही ये भी बहस छिड़ गई है कि क्या कट्टरता के आगे सद्भाव और भाईचारे का माहौल समाप्त हो जाएगा, इस बात का जवाब कटिहार के कासिम और नूरजहां का बनाया एक चूल्हा दे रहा है, जो वो छठ महापर्व में व्रतियों के बनाते हैं।

खरना के महाभोग के लिये बनाते हैं
बिहार के कटिहार में करीब पिछले बीस सालों से अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखने वाले कासिम और उनकी पत्नी नूरजहां छठ के खरना के महाभोग बनाने के लिये मिट्टी के चूल्हा बनाते हैं, 50,60,70 और 80 रुपये तक बिकने वाले ये चूल्हे जहां इस परिवार के लिये रोजगार का साधन है, तो वहीं समाज द्वारा बनाई गई जाति-धर्म की व्यवस्था तथा इसकी जकड़न पर छठ महापर्व बड़ी चोट करता है।

अपनी भागीदारी से खुश
दोनों दंपत्ति दूसरे धर्म के महापर्व में अपनी भागीदारी से बहुत खुश हैं, वो कहते हैं कि सालों से ये काम कर रहे हैं, जो भी खरीददार आते हैं, वो चूल्हा खरीदकर इस सहयोग के लिये शाबाशी देकर जाते हैं, जिससे मन गदगद हो जाता है, गरीबी अपनी जगह है, लेकिन दूसरे धर्म के महापर्व में जाने-अनजाने अपनी हिस्सेदारी से बेहद खुशी मिलती है।

यही त्योहार की खासियत है
चूल्हा खरीदने के लिये पहुंचे कैलाश शर्मा ने कहा कि यही तो महापर्व की खासियत है, जो सब कुछ भूल-भूलाकर विभिन्न जाति धर्म को एक सूत्र में बांधता है, धनंजय यादव कहते हैं कि आधुनिक होते शहर में पारंपरिक त्योहार में मिट्टी के चूल्हा बेहद मुश्किल से मिलता है, दूसरे धर्म से होने के बावजूद ये दंपत्ति जिस तरह से साफ-सुथरे तरीके से साफ दिल से चूल्हा बनाते हैं, ये बेहद खास है।

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