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Tuesday, November 10, 2020

यूपी का वो बाहुबली जिसका पुलिस ने किया फेक एनकाउंटर, दुश्मन बनकर दोस्त ने किया जानलेवा हमला

 

dhananjay singh fake encounter

बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों के साथ-साथ देश की नजर उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की सात विधानसभा सीटों पर भी है. बिहार सीटों की मतगणना के साथ यूपी उपचुनाव की सीटों की मतगणना भी जारी है. इस बीच यूपी के बाहुबली नेता धनंजय सिंह (Bahubali Dhananjay Singh) जबरदस्त चर्चाओं में बने हुए हैं. निर्दलीय बाहुबली नेता जौनपुर जिले की मल्हनी विधानसभा सीट (Malhani Seat) से चुनावी रण में उतरे हैं और इससे पहले भी वह दो बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं. इस समय वोटों की गिनती जारी है और जल्द ही परिणामों का ऐलान हो सकता है. राजनीति में धनंजय सिंह एक बड़ा नाम है और उनके ऊपर ना सिर्फ लूटपाट के बल्कि हत्या के मामले भी दर्ज हैं. जी हां, और पुलिस इस बाहुबली नेता को मरा भी घोषित कर चुकी है.

अकूत संपत्ति के मालिक
2018 में बागपत जेल में मारे गए कुख्यात बदमाश मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने अपने पति की हत्या की साजिश में भी धनंजय सिंह के शामिल होने का आरोप लगाया था.
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जब धनंजय सिंह ने 2017 विधानसभा चुनाव के लिए हलफनामा भरा था तब ये बात सामने आई थी कि, उनके ऊपर तीन आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और वह 5 करोड़ से अधिक रुपयों की संपत्ति के मालिक भी हैं.

पुलिस ने घोषित किया मरा
धनंजय सिंह यूपी का एक ऐसा नाम है जो एक वक्त में 50 हजार रुपए के इनामी बदमाश थे और यूपी पुलिस का पूरा महकमा उन्हें किसी भी हाल में पकड़ने में लगा था. फिर चाहे वो जिंदा पकड़े जाए या मुर्दा. ये बात है 1998 की जब धनंजय सिंह ने छात्र राजनीति से हटकर सियासत की दुनिया में कदम रखा ही था.
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बीबीसी हिंदी की एक रिपोर्ट की मानें तो, पुलिस को 17 अक्टूबर 1998 में मुखबिरों ने सूचना दी कि, धनंजय भदोही में एक पेट्रोल पंप पर डकैती डालने वाले हैं और सूचना पाकर पुलिस ने एक्शन में आ गई. उन्होंने एक्शन लेते हुए छापा मारा और मुठभेड़ के बाद धनंजय समेत चार लोगों को मृत घोषित कर दिया. लेकिन हकीकत इसके उलट थी.

निकला फेक एनकाउंटर
यूपी पुलिस ने खुद को साबित करने के लिए धनंजय को मरा हुआ बता दिया लेकिन असलियत ये थी कि, वो फेक एनकाउंटर (Fake Encounter) था और कुछ महीने बाद धनंजय खुद
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दुनिया के सामने आ गए थे. उनके सामने आते ही यूपी पुलिस की पोल खुल गई थी. फिर उन सभी पुलिसवालों पर मुकदमा दर्ज हुआ जो फेक एनकाउंटर में शामिल थे. फिलहाल ये मामला अब भी कोर्ट में है.

दोस्त बना दुश्मन
धनंजय सिंह जितनी शान से यूपी की सड़कों पर चलते हैं उनती ही अच्छी उनकी किस्मत भी है. बात है उस वक्त की जब धनंजय की मुलाकात अभय सिंह से हुई थी. दोनों की समय के साथ गहरी हुई और एक वक्त पर आकर दोस्ती दुश्मनी में बदल गई. फिर क्या था..अक्टूबर 2002 में कथित तौर पर अभय सिंह ने बनारस में धनंजय सिंह के काफिले पर हमला बोल दिया और खुलेआम दोनों गैंग के बीच जमकर गोलियां चली. धनंजय सिंह की किस्मत ही थी कि जो वह इस हमले में बच गए. हमले में धनंजय के गनर औऱ सहयोगी समेत 4 लोग घायल हुए थे और उन्होंने दोस्त से दुश्मन बने अभय के खिलाफ केस दर्ज कराया था. दोनों की दोस्ती किस बात पर बिगड़ी थी इसका खुलासा कभी नहीं हुआ.

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