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13 November 2020

जानिए, कैसे अर्नब के लिए उम्मीद और महाराष्ट्र सरकार की गले की फांस बने हरीश साल्वे

 


रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को देश की सर्वोच्च अदालत ने अंतरिम जमानत दे दी है, जिसके चलते 8 दिन बाद अपने शो :पूछता है भारत में वो फिर लाइव दिखाई दिए। अर्नब को जमानत दिलाने में कई लोगों ने अपने-अपने तरीके से योगदान दिया लेकिन सबसे महत्वपूर्ण भूमिका देश के वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे की थी, जिनकी कोर्ट में दी हुई मजबूत दलीलों के चलते सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब को आसानी से अंतरिम जमानत दे दी।

वकालत तो हर कोई करता है, लेकिन कुछ लोग पैसे को महत्व देते हैं तो कुछ व्यक्ति को। हरीश साल्वे का नाम उसी व्यक्ति वाली सूची में आता है। हरीश साल्वे ने अर्नब के केस की पूरी तह तक जाकर पहले केस मजबूत किया और फिर फ्रंटफुट पर आकर महाराष्ट्र सरकार से लेकर मुंबई की पुलिस तक की मुसीबतें बढ़ा दीं, हरीश साल्वे की इन्हीं दलीलों के चलते कोर्ट को अर्नब की याचिका के आधार पर उन्हें जमानत देनी पड़ी इस जमानत के साथ ही हरीश साल्वे की वकालत का एक बार फिर डंका बजा है।

अर्नब को  इसलिए गिरफ्तार किया गया था क्योंकि एक अन्वय नायक नामक व्यक्ति ने अपनी मां के साथ आत्महत्या की और उनके सुसाइड नोट में अर्नब को सुसाइड की  वजह बताया गया है। ये कितना बेतुका है कि कोई शख्स आत्महत्या कर ले, और यदि बेवजह ही उस शख्स के सुसाइड नोट में सीएम का नाम हो तो क्या उद्धव ठाकरे को गिरफ्तार किया जाएगा। हरीश साल्वे ने यही तर्क दिया था जो काफी वाजिब भी लगता है।

हरीश साल्वे को इसीलिए सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि उन्होंने अर्नब का पक्ष पूरे दम खम के साथ सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा है। हरीश साल्वे ने कहा कि महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार साज़िश और बदले की कार्रवाई की नीति से ही अर्नब पर झूठे केस लगा रही हैं। साल्वे ने केस का जिक्र करते हुए ये भी बताया कि महाराष्ट्र सरकार 2018 का एक बंद केस लेकर आई है जो कि, अप्रैल 2019 में बंद हो चुका था, जो इस केस पीछे की नीयत को दर्शाता है।

हरीश साल्वे को अपने इस पेशे में पैसों से ज्यादा मतलब नहीं रहता है और ये एक बार नहीं कई बार सामने आ चुका है। कुलभूषण जाधव का केस तो हमें पता ही है कि किस तरह से भारत की तरफ से कुलभूषण का पक्ष रखते हुए उन्होंने पाकिस्तान के झूठ की पोल-पट्टी खोल दी थी। कुछ ऐसा ही अब अर्नब के साथ होने पर हरीश साल्वे ने जमानत मांगने के साथ ही मुंबई पुलिस के इस रवैये को भी आड़े हाथो लिया। खास बात ये रही कि इस बार भी अर्नब के केस में हरीश साल्वे ने एक रुपया नहीं लिया है जो कि उनके निजी रवैए के सौम्य व्यवहार को दर्शाता है।

अर्नब गोस्वामी के अलावा कई ऐसे केस ऐसे हैं जिसमें साल्वे की भूमिका सबसे अहम थी। केंद्र सरकार के कई नेता निजी रुप से हरीश साल्वे को मित्र कहते हैं, लेकिन असल में वो भी अपने सभी कानूनी कामों का जिम्मा हरीश साल्वे पर ही छोड़ देते हैं क्योंकि साल्वे जैसा कोई दूसरा मिलना मुश्किल है।

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