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07 November 2020

यूपी की इन जेलों में बंद अपराधी बन जाते हैं करोड़पति

लखनऊ। एक अपराधी को जेल होने पर इस बात का दावा किया जाता है कि, अब अपराध के ग्राफ में गिरावट होगी लेकिन सच में ऐसा होता नहीं है। अपराधी के जेल में जाते ही उसे और साथी मिल जाते हैं और गिरोह बड़ा हो जाता है, वो पहले से भी ज्यादा बड़ा अपराधी बन जाता है। ऐसा ही कुछ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है, जहां जेल में बंद 17 अपराधी करोड़पति बन गए हैं। अपराधी भले जेल में बंद है लेकिन उसका गिरोह बाहर लूट, हत्या, डकैती, अपहरण, फिरौती वसूलने का काम रहा है। सिर्फ अपराध ही नहीं कई मामलों में अपराधी मध्यस्थता करवा कर भी मोटी रकम वसूलते हैं।

मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि, पिछले दिनों सीएम योगी के निर्देश के बाद प्रदेशभर में माफियाओं और अपराधियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया लेकिन ये अभियान सिर्फ दो से तीन दिन ही चला और अब फ्लॉप हो गया है। जेल में भी संजीव जीवा, सुशील मूंछ, योगेश भदौड़ा, सुनील राठी, धर्मेंद्र, उधमसिंह भूपेंद्र बाफर, सारिक, फाईक, भूपेंद्र बाफर, मीनू, अनिल दुजाना, मुकीम काला, सुंदर भाटी, सिंहराज भाटी, रणदीप भाटी, उमेश पंडित सक्रिय हैं।

Guidelines issued for sending rakhis to jail inmates in Punjab - chandigarh  - Hindustan Times

इनमे से कई ऐसे बड़े अपराधी हैं जो पिछले दस वर्षों से जेल में ही है लेकिन उसके बाद भी वो करोड़पति बन गए। सरकार की तरफ से जब अपराधियों की सूची मांगी गयी तो शासन ने इसे उपलब्ध भी कराया। उनकी संपत्ति पर अभियान शुरू भी हुआ ही था कि, पुलिस अपने पुराने ढर्रे पर आ गई। अपराधियों के बारे में भले आम आदमी तक को जानकारी हो लेकिन पुलिस अनभिज्ञ बनी रहती है।

6,804 Indian citizens languishing in foreign jails

कई केसों से बरी होने के बाद भी जमानत पर जेल से बाहर जाना ये अपराधी सुरक्षित नहीं समझते हैं और जेल में ही खुद सबसे ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। यह अपनी संपत्ति अपने रिश्तेदारों या फिर खास परिचित लोगों के नाम पर ही करोड़ों की संपत्ति खरीद रहे है। योगी सरकार बनने के बाद मेरठ जोन में ही 75 बदमाश पुलिस से मुठभेड़ में मारे गए थे।

Jharkhand HC Admits Petition on Mass Incarceration of Adivasis & Dalits |  CJP

1730 से अधिक अपराधियों के पैर में गोली लगी थी, वहीं पांच हज़ार से ज्यादा अपराधी गिरफ्तार भी हुए थे लेकिन अपराध कम होने का नाम नहीं ले रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अपराध की घटनाओं में हत्या, लूट और डकैती के मामले बढ़े ही हैं।

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