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01 November 2020

‘जब भारत है तो चीन से कैसा गठबंधन?’, अब रूस भारत की हर रक्षा जरूरत को पूरा करेगा


भारत के सबसे बड़े रक्षा साझेदार रूस ने एक बार फिर से चीन नहीं बल्कि भारत के साथ अपनी दोस्ती की आवश्यकताओं पर बल दिया है। रूस को चीन का साझेदार माना जाता है लेकिन रूस ने पिछले कुछ समय में यह साबित कर दिया है कि वह चीन नहीं, बल्कि भारत के साथ खड़ा है। रूस के एक्स्पर्ट्स भी यही सुझाव दे रहे हैं तो वहीं, रूस भारत की रक्षा जरूरतों को बुलेट स्पीड से पूरी कर यह संकेत दे रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार रूसी विदेश नीति और रणनीतिक मामलों के वरिष्ठ विशेषज्ञ ने कहा है कि मॉस्को अगर चीन के साथ एक संभावित सैन्य गठबंधन बनाता है तो यह उसके लिए खतरनाक साबित होगा और ये भारत के साथ पारंपरिक साझेदारी पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। बता दें कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में अनुमान लगाया था कि मॉस्को और चीन के बीच एक सैन्य गठबंधन संभव है। हालांकि, “सामान्य तौर पर” दोनों पक्षों को इसकी कोई आवश्यकता नहीं है।

Carnegie Moscow Center के निदेशक Dmitry Trenin के अनुसार, “चीन के साथ औपचारिक सैन्य गठबंधन पर हस्ताक्षर करना रूस के लिए अव्यावहारिक होगा, यह रूस के हाथों को बांध देगा और रूस के अन्य पारंपरिक सहयोगियों को विशेष रूप से अमेरिका के साथ सहयोग करने के लिए बाध्य करेगा। अब अमेरिका के खिलाफ चीन के साथ एक औपचारिक सैन्य गठबंधन करने की आवश्यकता नहीं है।

इस तरह के गठबंधन से रूस के हाथ बंध जाएंगे, जिससे भारत सहित उसके पड़ोसी जो आज रूस के साथ दिखाई देते हैं वो उसके साथ साझेदारी छोड़ अमेरिका के साथ सहयोग करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।”  Trenin के अनुसार रूस और चीन का सैन्य गठबंधन केवल तभी संभव होगा जब अमेरिका एक ही समय में दोनों देशों पर हमला कर दे।

विशेषज्ञों द्वारा इस तरह से भारत की तरफदारी से एक बात तो स्पष्ट हो चुकी है कि रूस चीन के लिए भारत के खिलाफ जाने से पहले 1000 बार सोचेगा, क्योंकि भारत और रूस की दोस्ती ऐतिहासिक रही है। भारत और रूस दशकों से रक्षा संबंधी साझेदारी को साझा करते आये हैं जो न केवल हथियारों की लेन-देन करते हैं, बल्कि ब्रह्मोस मिसाइलों का संयुक्त उत्पादन भी करते हैं। वर्तमान में रूस भारत की रक्षा जरूरतों का 60-70 प्रतिशत पूरा करता है।

रूस ने कई बार दिखाया है कि वह चीन को अब उतना महत्व नहीं देता जितना वह भारत को देता है। जून में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मास्को यात्रा के दौरान रूस को रक्षा आवश्यकता की लिस्ट सौपीं गयी थी। Wion की रिपोर्ट के अनुसार जून के महीने में सौंपी गई भारत की रक्षा उपकरण सूची से संबंधित आवश्यकताओं को रूस ने पूरा कर दिया है। वहीं, दूसरी तरफ देखा जाए तो रूस ने चीन को एस-400 की सप्लाई भी रोक दी है लेकिन रूस ने भारत को आश्वस्त किया है कि कोरोना के बावजूद भारत को एस400 पहले से तय समय पर ही दिये जाएंगे।

रिपोर्ट के अनुसार चीन के साथ सीमा विवाद और गलवान घाटी में भारतीय सेना पर हमले के बाद भारत ने जिन उपकरणों का ऑर्डर दिया था उनमें लाइट मशीन गन, प्रोजेक्टाइल और बम भी थे। हालांकि, रूस से खरीदे जाने वाले मिग 21 को लेकर कोई जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। जुलाई में, नई दिल्ली ने 21 मिग -29 और 12 SU-30 MKI विमानों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, इसके साथ ही इस डील में देश में मौजूद मिग-29 फाइटर जेट्स के अपग्रेडेशन का करार भी शामिल था। हालांकि, शिपमेंट की स्थिति अभी तक ज्ञात नहीं है, लेकिन मार्च 2021 तक इन हथियारों के आ जाने की उम्मीद है।

भारत और रूस के मजबूत संबंधों का एक महत्वपूर्ण कारण रक्षा भी रहा है। अब हर मुद्दे पर चीन को समर्थन देने वाला Russia भारत के मामले में खुलकर चीन का विरोध कर रहा है और वह भारत की भाषा बोल रहा है। इसके साथ ही भारत को हथियारों की आपूर्ति करने में भी तेज़ी दिखा रहा है। अब चीन को यह समझ लेना चाहिए कि उसका यह कम्युनिस्ट देश भी उसका साथ छोड़ चुका है और अब उसे कोई बचाने वाला नहीं है।

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