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17 November 2020

भगवान हनुमान का वो मंदिर, जहां पर खुद डॉक्टर बनकर भक्तों का करते हैं इलाज, जानें इस मंदिर का इतिहास

 


देश में भगवानों के प्रति आस्था तो हर व्यक्ति की है. कोई भोले को पूजता है, तो कोई दुर्गा को, कोई ब्रम्हा को, तो कोई काली को, कोई राम को, तो कोई साईं को, कोई गणेश को, तो कोई मुरली वाले को जितने लोग उतनी तरह की आस्था. लेकिन इस बीच भगवान हनुमान के प्रति लोगों की आस्था अपार देखी गई है. उन्हें हर स्थिति में मनुष्य याद करता है. वो चाहे किसी संकट में हो या फिर किसी बुरी स्थिति में फंस गया हो. व्यक्तियों की भगवान हनुमान के प्रति आस्था अटूट है. लेकिन देशभर में कई ऐसे हनुमान के मंदिर आज भी मौजूद हैं, जिन्हें चमत्कारी मंदिर कहा जाता है, और आज हम आपको उन्हीं मंदिरों के बारे में बताएंगे. जिनके बारे में लोग ये कहते हगैं कि उस मंदिर में भगवान बजरंगबली खुद आकर लोगों का इलाज करते हैं.

बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश के ग्वालियर में एक ऐसी हनुमान मंदिर स्थित है, जहां पर भगवान हनुमान खुद डॉक्टर बनकर आते हैं, और रोगी भक्तों का इलाज करते हैं. ये मंदिर ग्वालियर से करीब 70 किलोमीटर दूर भिंडे जिले में बसी है. इसे वहां पर दंदरौआ सरकार धाम के नाम से जाना जाता है. कहा जाता है कि इस मंदिर में भक्त अपने स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों को लेकर आते हैं. यहां पर आने वाला हर व्यक्ति यही सोचकर आता है कि उसके सारे कष्ट दूर हो जाएंगे. कहते ये भी हैं कि यहां पर अपनी परेशानी को लेकर यूं तो हर रोज भक्त आते हैं, लेकिन मंगलवार और शनिवार के दिन काफी दूर-दराज से लोग यहां आते हैं. लेकिन मंदिर को खास इसलिए माना जाता है, क्योंकि यहां पर आने वाले हर व्यक्ति को अपनी परेशानी से छुटकारा मिलता है.

दरअसल इस मंदिर में भगवान हनुमान को डॉक्टर के रूप में पूजा जाता है. कहते हैं कि जो भी इंसान यहां बीमारी को लेकर आता है, उसको मुक्ति मिलती है. यहां तक लोग ये भी कहते हैं कि फिर कभी उस व्यक्ति को कोई शारीरिक बीमारी नहीं होती. इसके साथ ही बता दें कि इस मंदिर में भगवान हनुमान की मूर्ति नृत्य की मुद्रा में स्थापित है. जो देश में ऐसी पहली कोई हनुमान भगवान की मूर्ति है, जो नृत्य की मुद्रा में है.

कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण लगभग 300 साल पहले करवाया गया था. इसके अलावा इस मंदिर में जिस मूर्ति को स्थापित किया गया है, कहते हैं कि वो एक पेड़ की कटाई के दौरान मिली थी. जो 300 साल पहले नीम के पेड़ में छिपाई गई थी. कहा जाता है कि इस मंदिर में लोग कैंसर, टीवी, एड्स जैसी बड़ी बीमारियों का इलाज कराने के लिए आते हैं, जिन पर भगवान बजरंगबली अपनी कूपा दिखाते हैं, और उनकी सारी बीमारियां यहीं समाप्त हो जाती है. कहते हैं कि भक्त की हर मनोकामना इस मंदिर में आने के बाद पूरी हो जाती है. इसलिए यहां पर दर्शन करने के लिए काफी दूर-दूर से लोग आते हैं.

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