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23 November 2020

किसी भी नंबर बल्लेबाजी के लिये तैयार, ऑस्ट्रेलिया सीरीज से पहले रोहित शर्मा का बड़ा बयान!

 

कार में अकेले बैठे हुए भी लगाना होगा मास्क? जानिये सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

दिल्ली सरकार ने 18 नवंबर को हाईकोर्ट में दिये अपने हलफनामे में कहा था कि सड़क पर कार को प्राइवेट व्हीकल बताकर मास्क लगाने से नहीं बचा जा सकता, दिल्ली सरकार ने ये हलफनामा उस याचिका पर दिया था, जिसमें बंद कार में अकेले ड्राइविंग कर रहे शख्स को मास्क ना लगाने पर 500 रुपये के जुर्माने को कोर्ट में चुनौती दी गई थी, क्या वाकई में सड़क पर खड़ी और चलती कार एक प्राइवेट स्पेस की कैटेगरी में आती है, आइये आपको बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा।

10 लाख का मुआवजा
बता दें कि दिल्ली सरकार ने ये हलफनामा दिल्ली हाई कोर्ट के वकील सौरव शर्मा द्वारा लगाई गई याचिका पर दिया है, courtजिसमें कहा गया है कि 9 सितंबर को चलती गाड़ी को रोककर उनका चालान कर दिया गया, जबकि वो अपनी गाड़ी में अकेले ही घर से ऑफिस जा रहे थे, इस पर याचिकाकर्ता ने मेंटल हैरेसमेंट के लिये 10 लाख रुपये का मुआवजा मांगा है।

मास्क पहनने को लेकर गाइडलाइन
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमण के बढते प्रभाव को देखते हुए डिजास्टर मैनेजमेंट के अध्यक्ष ने 8 अप्रैल को अपने एक आदेश में कहा कि जनहित के लिये ये जरुरी है कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के लिये मास्क पहनना जरुरी होगा, साथ ही ये भी आदेश जारी किया गया था कि किसी भी व्यक्ति के लिये निजी और ऑफिस व्हीकल में भी मास्क पहनना आवश्यक होगा।

किस आधार पर मांगा मुआवजा
याचिकाकर्ता और वकील सौरव शर्मा का कहना था कि उनका जो चालान काटा गया, उसमें मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कोई अपराध नहीं बनता है, उन्होने ये भी कहा कि वसूले गये चालान की रकम को किस विभाग को जमा की जाएगी, ये भी साफ नहीं है, साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से ऐसी कोई भी गाइडलाइन जारी नहीं की गई है, जिसमें अकेले कार में सफर करते हुए मास्क लगाना जरुरी बताया गया है। इस पर दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सतविंदर सिंह एंड ओआरएस बनाम बिहार राज्य के मामले का उल्लेख किया ।

क्या कहा कोर्ट ने
सुप्रीम कोर्ट बिहार में शराबबंदी के मामले में कार में शराब पीते लोगों पर ये टिप्पणी की थी, बिहार उत्पाद शुल्क (संशोधन) अधिनियम 2016 की धारा 2(17ए) के तहत सड़क पर मौजूद किसी भी व्यक्ति की कार प्राइवेट स्पेस की कैटेगरी में नहीं रखी जा सकती है, COURTजस्टिस अशोक भूषण और के एम जोसेफ की खंडपीठ ने पिछले साल 1 जुलाई को फैसला सुनाया था कि सार्वजनिक स्थानों से गुजरने वाले व्हीकल को पब्लिक स्पेस की श्रेणी में रखा जाएगा, सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता के इस तर्क को खारिज कर दिया था।

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