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Thursday, November 19, 2020

कभी संस्कृत भाषा की छापते थे मैगजीन, अब बीजेपी ने खेला बड़ा दांव, बनाया राज्यसभा उम्मीदवार

 

कभी संस्कृत भाषा की छापते थे मैगजीन, अब बीजेपी ने खेला बड़ा दांव, बनाया राज्यसभा उम्मीदवार

बीजेपी अकसर ही अपने प्रत्याशियों और मुख्यमंत्रियों के चुनाव से लोगों को हैरान करती रहती है । अब बीजेपी ने कर्नाटक में एक ऐसे ही चेहरे का चयन किया है । यहां से राज्यसभा के लिए एक छापाखाना चलाने वाले शख्स को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित कर दिया गया है। के नारायण नाम के ये शख्‍स 63 साल के हैं और कोरोना से अशोक गस्ती की मौत के बाद खाली हुई सीट पर लड़ेंगे ।

अब तक नहीं थी चर्चा
दरअसल के नारायण कर्नाटक में पिछड़ी जाति देवांगा से आते हैं, ये बुनकर समाज से हैं । कर्नाटक बीजेपी में अब तक इनकी कोई खास पहचान नहीं थी। लेकिन संघ परिवार उनके काम से बेहद प्रभावित है, नारायण स्पैन प्रिंट नाम से एक प्रिंटिंग फर्म चलाते हैं । नारायण ‘संभाषण संदेश’ नाम की एक मैगजीन छापते हैं, जो कि संस्कृत भाषा को लोकप्रिय बनाने का काम करती है । वो कई वर्षों से इस पत्रिका को निकालते आ रहे हैं, इसके साथ ही वह तटीय कर्नाटक में सामाजिक कार्यों में लगे हैं।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने दी बधाई
के नारायण का नाम सामने आने के बाद मुख्‍यमंत्री बीएस येदुरप्पा ने कहा- ‘मैं के नारायण को हृदय से बधाई देता हूं। राज्यसभा के लिए उन्हें पार्टी उम्मीदवार चुनाव गया है।’ राजनीतिक जानकारों के अनुसार, पार्टी का यह फैसला बीजेपी की हालिया नीतियों पर आधारित ही नजर आ रहा है।पिछले दिनों ये बात सामने आई है कि बीजेपी बीएस येदुरप्पा को राज्य के बाहर के मामलों में बहुत कम ही या न के बराबर शामिल करती है । जब जून 2019 में कर्नाटक में राज्यसभा के चुनाव हुए थे। तब भी बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने बीएस येदुरप्पा की बात नहीं मानी थी।

येदुरप्पा की सलाह दरकिनार
दरअसल सीएम येदुरप्‍पा लंबे समय से पार्टी वर्कर रहे एरन्ना कडाड़ी का नाम उम्मीदवार के रूप में चाहते थे, वह लिंगायत समुदाय से आते थे । लेकिन बीजेपी ने अशोक गस्ती को मौका दिया । लेकिन कोरोना से संक्रमित होने का कारण उनका निधन हो गया । गस्‍ती 55 वर्ष के थे और बीजेपी के जमीनी स्तर के कार्यकर्ता रहे। उन्हें निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुना गया था। कर्नाटक में अब 1 दिसंबर को राज्यसभा की एक सीट के लिए उपचुनाव कराया जाएगा।

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