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05 November 2020

अर्नब की गिरफ्तारी से खुश हुआ पीड़ित परिवार, पुलिस का धन्यवाद करते हुए कहा हमें न्याय चाहिए

 

Arnab Goswami arrested

रिपब्लिक भारत (Republic India) के जरिए लगातार महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government ) पर हमलावर हो रहे देश के बड़े पत्रकार अर्नब गोस्वामी (Arnab Goswami) को बुद्धवार की सुबह मुंबई पुलिस (Mumbai police) ने गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद राजनीति से लेकर प्रशासन में भी जमकर हंगामा हुआ. लोग अर्नब को न्याय दिलाने की मांग करते हुए सड़कों पर उतर आए थे. लेकिन उसी बीच पीड़ित परिवार की सदस्य अन्वय नाइक (Anvay Naik) ने पत्रकार अर्णब गोस्वामी (Arnab Goswami) की गिरफ्तारी का स्वागत किया है. दरअसल अर्नब पर 53 साल की इंटीरियर डिजायनर अन्वय नाइक और उनकी मां को आत्महत्या के लिए उकसाने का संगीन आरोप लगा है.

इसी आरोप में महाराष्ट्र की रायगढ़ पुलिस ने बुद्धवार के दिन सुबह के समय ही अर्नब गोस्वामी (Arnab Goswami) को गिरफ्तार किया. पीटीआई के द्वारा जारी की गई रिपोर्ट की माने तो अन्वय नाइक की पत्नी अक्षिता नाइक (Akshita Naik) ने इस केस के बारे में बात करते हुए कहा है कि, मैं मुंबई पुलिस (Mumbai Police) के इस एक्शन का शुक्रिया अदा करती हूं, जो ऐसा दिन मुझे देखने को मिला. इस मामले को लेकर मैनें बहुत धीरज रखा था. हालांकि इससे मेरे पति और मेरी सासू मां वापस तो नहीं आ सकते हैं, लेकिन मेरे लिए वो हमेशा जिंदा हैं. बुद्धवार की दोपहर मीडिया से रूबरू होते हुए अन्वय की बेटी और पत्नी ने कहा कि इस क्षण का इंतजार उन्होंने काफी समय से किया था, अब आशा है कि न्याय मिलेगा.

केस को लेकर अक्षिता नाइक ने बताया कि, ‘मेरे पति ने सुसाइड करने से पहले एक नोट छोड़ा था जिसमें उन्होंने तीन लोगों का नाम लिखा था, इसके बाद किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. हालांकि इतने समय के बाद महाराष्ट्र पुलिस ने ये कदम उठाया है. इसलिए उनका मैं धन्यवाद करती हूं. यदि उस समय मेरे पति को पैसा दे दिया गया होता तो आज वो हमारे बीच होते.’ इसके साथ ही नाइक के परिवार वालों ने इस बात को लेकर भी दावा ठोका है कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, साइबर सेल डिपार्टमेंट और आर्थिक अपराध शाखा को भी इसके बारे में लेटर लिखा था, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया.

अन्वय की बेटी अदन्या नाइक (Adnya Naik) ने बताया कि, ‘रिपब्लिक (Republic) की ओर से मेरे पिता को 83 लाख रुपये नहीं दिए गए. इस बात को लेकर पिता ने उन्हें ईमेल भी किया था, लेकिन सामने से कोई रिप्लाई नहीं आया. यही नहीं बल्कि मेरे पिता को धमकियां दी जाती रही थी, बाइकर्स उस समय उनका पीछा करते थे. कई लोग सीधा घर में ही आकर बैठ जाते थे. यहां तक कि हमारे फोन भी टैप किए जाते थे. उन्होंने तो मेरा करियर तक बर्बाद करने की धमकी दी.’ आगे अदन्या ने ये भी कहा कि, ‘अर्नब एक माने-जाने शख्स हैं इसलिए केस को दबाया गया. हमें लोगों का सपोर्ट मिल रहा था, लेकिन उस दौरान अर्नब को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?. हम ये जानना चाहते हैं. हमें संस्थाओं पर यकीन है और हमने हर एक का दरवाजा खटखटाया.’

अक्षिता नाइक ने अपने बयान में कहा कि, ‘यदि किसी भी शख्स को 5 हजार या फिर पांच सौ का नुकसान हो तो, क्या तकलीफ नहीं होती है? क्या हमें जीने का हक नहीं है, या सिर्फ अर्नब को ही ये अधिकार मिला है? सुशांत के केस में अर्नब बहुत कुछ बोल रहे थे. मेरे पति ने तो अपने उस सुसाइड नोट में अर्नब का नाम तक लिखा था, लेकिन इसके बाद भी उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया. इसलिए देश के लोगों को सच का सपोर्ट करना चाहिए, इस मसले में सियासत के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है.’

नाइक के परिजनों का ये भी आरोप है कि, अर्नब ने बयान में ये बात कही है कि उन्होंने अलीबाग में अपना बयान रिकॉर्ड करवाया है, जबकि सच ये है कि उनका बयान ज्वॉइंट पुलिस कमिश्नर के ऑफिस में दर्ज किया गया. आखिर एक पत्रकार को इतना विशेषाधिकार क्यों? परिवार ने बताया कि इस मसले को लेकर हमने मौजूदा पुलिस कमिश्नर संजय बर्वे, रायगढ़ के एसपी अनिल पारस्कर और जांच अधिकारी सुरेश वरडे से मिले. लेकिन आखिर तक हमें इसके बारे में कुछ भी नहीं बताया गया. हमसे बस यही कहा जाता था कि, आपको कोर्ट में बुलाया जाएगा, लेकिन काफी समय बाद ये जानकारी हाथ लगी कि इस केस को ही बंद कर दिया गया है.

इतना ही नहीं नाइक की फैमिली ने पुलिस पर भी आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि पुलिस उन पर इस मामले को लेकर दबाव बना रही थी, कि हम अपनी शिकायत को वापस ले लें. साथ ही हम ये बयान दें कि भावनाओं में आकर हमने ये केस दायर किया था. हालांकि मामले को लेकर महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) ने अपने बयान में ये बात कही है कि, कोई भी शख्स कानून से ऊपर नहीं है. इसलिए महाराष्ट्र पुलिस कानून के हिसाब से अपनी आगे की कार्रवाई करेगी. फिलहाल दूसरी तरफ पत्रकार की गिरफ्तारी को लेकर लगातार भाजपा महाराष्ट्र की सरकार में शामिल सोनिया गांधी पर हमला बोल रही है. हालांकि इस केस में क्या नया मोड़ देखने को मिलेगा ये तो आने वाला समय ही बताएगा. फिलहाल केस फिर से खुल चुका है और मामले की तहकीकात की जा रही है.

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