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12 November 2020

बरखा जी, स्वराज कौशल, ज़ुबिन ईरानी, श्री सीतारमन और भी कई भारतीय पति हैं जो अपनी पत्नियों की सफलता से असहज नहीं होते

 


बरखा दत्त एक बार फिर से सुर्खियों में है, और इस बार भी गलत कारणों से। कमला हैरिस के अमेरिका के भावी उपराष्ट्रपति बनने की संभावना पर उछलती हुई मोहतरमा ने एक ऐसा ट्वीट डाला, जिससे उनका समर्थन कम, और उनका उपहास अधिक उड़ाया गया।

अति नारीवाद के नशे में चूर बरखा ने कमला हैरिस के पति के साथ खींची गई उनकी एक फोटो पर टिप्पणी करते हुए ट्वीट किया, “मुझे ऐसा एक भारतीय आदमी दिखा दीजिए जो ऐसी बीवी पर गर्व करे!”


यहाँ बरखा का निशाना एक बार फिर भारतीय पुरुष थे, जो उनके अनुसार अपने पत्नी की प्रगति से खुश नहीं रह सकते, और न ही उनके विचारों का सम्मान करते हैं। कमला हैरिस के उदाहरण के जरिए वे एक बार फिर भारत को लज्जित कराना चाहती थी, लेकिन यह दांव उलट पड़ गया। ऐसे में बरखा के इस विवादित ट्वीट का लोगों ने जमकर मज़ाक उड़ाया, और काफी समय से बरखा का नाम ट्विटर पर इसी वजह से ट्रेंड भी कर रहा है।

बरखा के इन्ही दावों के एक अनोखे उदाहरण से धज्जियां उड़ाती हुई मोनिका नामक ट्विटर यूज़र ने ट्वीट किया, “पति कहते हैं कि वे मोदी को वोट देंगे क्योंकि उनकी पत्नी ने ऐसा कहा है। बिहार के एक छोटे से गाँव में नारिवाद का इससे बढ़िया उदाहरण नहीं मिल सकता, पर बरखा को लगता है कि भारतीय पुरुष असहज है। लानत है!”

शायद बरखा दत्त को पता नहीं है, या इस बात को स्वीकारना नहीं चाहती है कि भारतीय पुरुष ऐसे भी हैं, कि यदि उनकी पत्नी योग्य हो, तो वे उनके सपनों के आड़े कभी नहीं आते, बल्कि उनके पूरा होने तक उनका कदम कदम पर साथ भी देते हैं।

उदाहरण के लिए बरखा आनंदी गोपाल जोशी के बारे में ही पढ़ लेती। यूं तो इसका नाता राजनीति से नहीं, परंतु आनंदी का उदाहरण इतना बताने के लिए पर्याप्त है कि भारतीय पुरुष इतने भी असहज नहीं हैं। आनंदी गोपाल जोशी एक अबोध बालिका थी, जिनका विवाह 9 वर्ष की आयु में ही एक विधुर पोस्ट ऑफिस कर्मचारी गोपाल जोशी से करा दिया गया। लेकिन गोपाल अपनी पत्नी को आगे बढ़ने देने का स्वप्न देखते थे, और उन्हे डॉक्टर बनने के लिए भी प्रेरित किया। भले ही आनंदी का अल्पायु में स्वर्गवास हुआ, पर वे न केवल अपनी मेडिसिन की पढ़ाई पूरी करने में सफल रही, अपितु उन्होंने भारत की पहली महिला डॉक्टर बनने का भी गौरव प्राप्त किया।

अगर वे वर्तमान में कोई उदाहरण खोजना चाहती थी, तो स्वराज कौशल को ही ले लीजिए। उनकी पत्नी सुषमा स्वराज न केवल एक कद्दावर नेता थी, बल्कि आगे चलकर भारत की विदेश मंत्री भी बनी। लेकिन न तो उन्होंने कभी सुषमा पर किसी प्रकार का दबाव डाला, और न ही वे उनके सपनों के पूरा होने में आड़े आए। उन्होंने हर कदम पर सुषमा स्वराज का पूरा पूरा साथ दिया।

इसी प्रकार से जब स्मृति ईरानी ने सक्रिय राजनीति में उतरने का निर्णय किया, तो उनके पति ज़ुबिन ईरानी ने भी पूरा पूरा साथ दिया, और उनके निर्णयों का समर्थन किया। सच कहें तो बरखा दत्त अभी भी समझती हैं कि भारत की जनता बेवकूफ है, और वो जो भी कहेगी, उसे लोग सिर आँखों पर नवाएंगे। लेकिन अब ऐसा और नहीं चलेगा।

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