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20 November 2020

‘आपकी लापरवाहियों के कारण आज दिल्ली बेहाल है’, केजरीवाल को दिल्ली हाई कोर्ट से जबरदस्त फटकार

 


राजधानी दिल्ली में कोरोनावायरस की तीसरी लहर आ चुकी है ये बात खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन भी मान चुके हैं। दिल्ली में रोजाना कोरोनावायरस के 7 हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार को लताड़ लगाई और कहा कि जब मामले बढ़ रहे थे तो सरकार ने उन्हें रोकने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए। इसमें कोई शक नहीं है कि दिल्ली में कोरोना के मामले गृहमंत्री के कदमों के बाद लगभग खात्मे की ओर पहुंच गए थे, लेकिन केजरीवाल सरकार की नाकामी अब जनता को भुगतनी पड़ रही है और इसका सीधा नुकसान दिल्ली और एनसीआर की जनता को हो रहा है, और उन पर एक बार फिर लॉकडाउन की तलवार लटक रही है।

दिल्ली में बढ़ते कोरोनावायरस को लेकर सभी के निशाने पर दिल्ली की केजरीवाल सरकार और प्रशासन आ गया है। स्थिति ये हो गई है कि यहां एक दिन में कोरोना के नए केसों की संख्या 7,486 तक पहुंच गई है। वहीं, मौतों का दैनिक आंकड़ा 121 तक चला गया है। मौतों को लेकर सबसे चौंकने वाला आंकड़ा बताता है कि दिल्ली में कोरोना से अब तक की कुल मौतों की 21 फीसदी पिछले एक हफ्ते में ही हुई हैं, जो कि राज्य सरकार की भयावह लापरवाह स्थिति की दर्शाता है।

अब दिल्ली में संक्रमण की नवीनतम लहर ने अधिक से अधिक जाने लेना शुरू कर दिया है। मौत के आंकड़ों में 9% की वृद्धि हुई है, और पिछले एक सप्ताह में भारत में काेराेना से कुल मौतों के आंकड़े में 21% मौतें केवल दिल्ली में हुई हैं।

राजधानी की स्थिति को देखते हुे अब दिल्ली हाईकोर्ट के सब्र का बांध भी टूट गया है। हाईकोर्ट कोर्ट ने केजरीवाल सरकार को तगड़ी फटकार लगा दी है। अदालत ने दिल्ली में कोरोना से बढ़ते मौतों के आंकड़ों पर नाराजगी जताई है। वहीं, इस मुद्दे पर सरकार की उदासीनता को शर्मनाक बताया है। इस मामले में अदालत की जस्टिस सुब्रह्मण्यम प्रसाद की पीठ ने सवाल किया, दिल्ली सरकार कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए अदालत के हस्तक्षेप का इंतजार क्यों करती रहीउसने कोविड-19 का प्रसार रोकने के लिए शादी समारोहों में अतिथियों की संख्या 50 तक क्यों सीमित नहीं की?”

राजधानी में बढ़ते कोरोना केसों के बावजूद दिल्ली सरकार शुरू में उदासीन रही और कोई कारगर कदम नहीं उठाय। इस लापरवाही को दिल्ली हाईकोर्ट ने ही उजागर कर दिया है। कोर्ट की सुब्रमण्यम प्रसाद पीठ ने सवाल उठाया,

आपने (दिल्ली सरकार) एक नवंबर से ही यह देखना शुरू किया कि स्थिति किस ओर जा रही है, लेकिन अब जब हमने आपसे कुछ सवाल किए हैंतो आप पलट गए। जब शहर में संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ रही थी तो स्पष्ट तौर पर कदम उठाए जाने चाहिए थे। आप तब क्यों नहीं जागेजब आपने देखा कि स्थिति खराब हो रही हैहमें आपको 11 नवंबर को नींद से जगाने की जरूरत क्यों पड़ीआपने एक नवंबर से 11 नवंबर तक क्या कियाआपने फैसला लेने के लिए 18 दिन तक (18 नवंबर तक) क्यों इंतजार कियाक्या आपको पता है कि इस बीच कितने लोगों की मौत हो गईजिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया हैक्या आप उन्हें जवाब दे पाएंगे?”

मास्क न पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग करने में लोगों की लापरवाही पर दिल्ली सरकार की कार्रवाई को भी कोर्ट ने ढुलमुल बताया है, और कहा कि सरकार को इन सारे बिंदुओं को एक बड़े परिपेक्ष्य में देखना चाहिए। पीठ ने कहा, आप किस तरह की निगरानी कर रहे हैंआप चीजों को गंभीरता से ‘बड़े चश्मे’ से देखें। आप न्यूयॉर्क और साउ पाउलो जैसे शहरों से भी आगे निकल चुके हैं।”

गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट इस महीने पहले ही कोरोनावायरस के मामलों को लेकर केजरीवाल सरकार को फटकार लगा चुकी है। कोर्ट ने शवदाह गृह की स्थितियों को भी सुधारने का आदेश देते हुए कहा कि ये सभी भरे पड़े हैं। कोर्ट ने लापरवाही के कारण हुई इन मौतों के लिए दिल्ली सरकार की लापरवाही को जिम्मेदार बताया है। कोर्ट ने सख्त रुख और हर मुद्दे पर लताड़ लगाकर साबित कर दिया है कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार कोरोनावायरस की रोकथाम में पूरी तरह से विफल रही है।

हम आपको अपनी रिपोर्ट में पहले ही बता चुके हैं कि प्रतिदिन आ रहे 5-6 हजार कोरोना के मामलों को 600-700 के दैनिक आंकड़े तक पहुंचाने में सबसे बड़ी भूमिका देश के गृहमंत्री अमित शाह की रही थी। उन्होंने ग्राउंड जीरो पर उतरकर काम किया था और दिल्ली से कोरोनावायरस के काले बादल लगभग-लगभग छंट गए थे। इसके बावजूद दिल्ली सरकार की लापरवाही, डॉक्टरों के साथ उनके मतभेद और उदासीन रवैए के चलते राजधानी में केस एक बार फिर बढ़ गए हैं। इस पूरी लापरवाही की जिम्मेदारी दिल्ली की अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार है, जो केवल बेवजह के मुद्दों पर राजनीति करती है लेकिन जब जनहित के कार्यों का मौका आता है तो ये सरकार पूरी तरह विफल साबित होती है। कोरोनावायरस की महामारी ने एक बार फिर इस नाकाम सरकार और इसके अनुभवहीन मुख्यमंत्री की पोल खोल दी है।

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