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22 November 2020

प्रशांत किशोर और दीदी ने BJP को सत्ता से हटाने का बनाया ‘मास्टर प्लान’, जानें क्यों बिहार की राजनीति से हुए दूर

mamta prashant kishor

आगामी साल में बंगाल में विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने वाला है. लेकिन उससे पहले ही राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रणनीति बनाने में पूरे जोरो-शोरो से लगी हुई हैं. जानकारी की माने तो जल्द ही एक बड़ा जन अभियान भी शुरु होने वाला है, जिसका नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं. दरअसल पिछले 10 सालों में ममता दीदी ने जो काम राज्य में किए हैं, इसकी राग पूरे प्रदेश में फैलाने के लिए इस अभियान की शुरुआत कर रही है. खास बात तो ये है कि इस बार अभियान में सिर्फ ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ही नहीं बल्कि कभी बिहार की राजनीति की काया पलट करने वाले प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) भी शामिल हो रहे हैं. ऐसे में ये जोड़ी बंगाल के चुनाव में जीत की कितनी भागीदार बनती है, ये तो वक्त ही बताएगा.

हालांकि इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में पूरे वक्त कहीं भी प्रशांत किशोर को नहीं देखा गया. इसकी वजह ये थी कि काफी समय से पीके ममता बनर्जी के संपर्क में रहकर बंगाल की राजनीति में अपना दमखम जमाने की कोशिश में लगे हुए हैं. जानकारी के मुताबिक कहा जा रहा है कि, प्रशांत किशोर की कंपनी आईपैक काफी वक्त पहले से ही ममता बनर्जी के लिए इस अभियान की तैयारी कर रही है. यही नहीं बल्कि पीके से जुड़े सैकड़ों कार्यकर्ता इस अभियान में दिन-रात एक कर रहे हैं.

पीटीआई के हवाले से जारी की गई एक रिपोर्ट की माने तो टीएमसी के इस जन अभियान का नाम बंगोध्वनि रखा गया है. इसका अर्थ ये है, बंगाल की आवाज. बताया जा रहा है कि, इस अभियान के जरिए TMC से जुड़े कार्यकर्ता बंगाल के 78908 बूथ तक पहुंचेंगे. इसके बाद ममता के राज में हुए हर काम का एक-एक ब्यौरा लोगों के समक्ष रखेंगे. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ये है कि, टीएमसी कार्यकर्ता राज्य के हर घर में जाएं और लोगों से उनका फीडबैक लें. साथ ही उनकी सरकार से किस तरह की शिकायत है उसके बारे में जानें. ताकि उस हिसाब से पार्टी आगे के काम को बढ़ा सके, और चुनाव से जुड़ी रणनीति तैयार करे.

खास बात तो ये है कि, बंगाल में बीजेपी की तरफ से भी एक ऐसे ही अभियान की शुरूआत की गई है. जिसमें केन्द्रीय टीम से संबंधित कई बड़े नेता खुद जनता से फीडबैक लेने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि बात करें ममता बनर्जी के अभियान की तो, टीएमसी कार्यकर्ता इस चुनावी अभियान में एक-एक घर पर पहुंचेेंगे, यही नहीं TMC के नेताओं के साथ पीके की कंपनी के भी मेंबर उनके साथ मौजूद होंगे, जो लोगों के फीडबैक लेंगे. इसके लिए राज्य से जुड़े सभी इलाके के किसी खास और प्रभावशाली शख्स से मुलाकात करने की योजना बनाई जा रही है. जिसके सहारे ममता की पार्टी जनता का वोट हासिल कर सके.

बता दें कि साल 2021 के अप्रैल-मई महीने में बंगाल की 294 सीटों पर चुनाव होने वाला है. इस चुनाव में टीएमसी अपनी तरफ से हर एक मुमकिन प्रयास कर रही है, ताकि जनता को अपनी पक्ष में कर सके. यही नहीं राज्य की पिछड़ी जातियों को अपनी तरफ करने के लिए ममता बनर्जी पहले से ही अभियान की शुरूआत कर चुकी हैं. इसका मुख्य लक्ष्य ये है कि बीजेपी को दलित विरोधी साबित करके पिछड़ी जातियों का वोट टीएमसी खुद ले सके.

दो फेज में चलेगा ममता बनर्जी का अभियान
खबरों के मुताबिक तृणमूल की ओर से आयोजित किया जाने वाला ये अभियान दो फेज में चलाया जाएगा. इसमें कुल 2 हजार कार्यकर्ता के शामिल होने की बात कही जा रही है. जो हर व्यक्ति के घर जाएंगे. दरअसल 10 हजार से ज्यादा घरों में रहने वाले 1 करोड़ से भी ज्यादा लोगों के पास पहुंचने का प्लान बना है. बताया जा रहा है, कि इनमें से हर एक शख्स दलित परिवार से जुड़ा हुआ है. जिनसे मुलाकात करके सरकार की तरफ से सालभर किए गए काम से रूबरू करवाया जाएगा. यही नहीं बल्कि बीजेपी जिस मकसद से बंगाल में चुनाव लड़ने वाली है, उससे भी लोगों को आगाह करने का पूरा प्लान है.

बता दें कि ममता बनर्जी की तरफ से शुरू किया जाने वाला ये पहला अभियान नहीं है. इससे पहले भी पीके की ओर से दो अभियान चलाए गए हैं. इनमें से एक का नाम दीदी के बोलो (दीदी से बोलो) है, और दूसरे का नाम बंगलार गोरबो ममता (बंगाल की गर्व ममता) अभियान है. हालांकि बात करें बीजेपी की तो इस राज्य में कभी भी भाजपा अपनी सरकार बनाने में कामयाब नहीं रही है. लेकिन लोकसभा चुनाव की बात है, जब बीजेपी ने 42 में से 18 सीटों पर कब्जा किया था. यही वो सबसे बड़ा कारण है जिससे ममता बनर्जी को विधानसभा चुनाव में बीजेपी के खलल डालने का डर कहीं न कहीं सताने लगा है.

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