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11 November 2020

कथित सेक्युलर पार्टियों’ का खेल बिगाड़ने वाले ओवैसी इनके लिए BJP से भी बड़ी बाधा बन गये हैं

 

बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत में पीएम मोदी समेत एनडीए के अपने नेताओं का रोल तो अहम है ही… लेकिन उतना ही अहम रोल लोकसभा सांसद और एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी का भी है, जिनकी मौजदूगी ने बिहार चुनाव का पूरा ही गेम पलट दिया है। उनकी मौजूदगी का फायदा बीजेपी ने उठाया है। बीजेपी विरोधी उन्हें बीजेपी का एजेंट मानते हैं और वो लोग नतीजों के बाद से ही ओवैसी को कोस रहे हैं। इसके बावजूद ओवैसी ने अब बिहार के बाद पश्चिम बंगाल में भी चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है जो कि विपक्षियों के लिए बीजेपी से बड़ा खतरा हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों में विपक्ष के लिए बड़ा खतरा साबित होने वाले ओवैसी ने अब विपक्षियों के लिए एक नई मुसीबत की पटकथा लिखनी शुरु कर दी है। ओवैसी का कहना है कि बिहार के बाद यूपी, बंगाल, मध्य प्रदेश के भी वो चुनाव लड़ेंगे और देश का लोकतंत्र उन्हें ये अधिकार भी देता है। इस दौरान उन्होंने बंगाल के कांग्रेस समेत कई नेताओं को भी निशाने पर लिया है।

ओवैसी ने पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में लड़ने की घोषणा करते हुए कहा, असदुद्दीन ओवैसी एक सितारा है। मुझे जो कुछ भी करना होता हैमैं करता हूं। हम बंगाल में आ रहे हैं और किसी भी कीमत पर वहां जाएंगे। हम मुर्शिदाबादमाल्दादिनाजपुर के इलाकों में जाएंगे। क्या अधीर रंजन चौधरी ने वहां मुस्लिमों का ठेका लिया हुआ है?’ गौरतलब है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और बंगाल से कांग्रेस नेता सांसद अधीर रंजन लगातार ओवैसी पर वोट काटने का इल्जाम लगाते रहे हैं। इसके बाद अब ओवैसी उन पर भी बरस पड़े हैं।

गौरतलब है कि ओवैसी का इस तरह से चुनाव लड़ने की घोषणा करना बीजेपी के लिए फायदे का सौदा साबित होता है, जिसके चलते उन्हें बीजेपी का एजेंट भी कहा जाता है। AIMIM को लेकर ये भी सामने आया कि उत्तर भारत में ओवैसी ने जहां-जहां चुनाव लड़ा है, वहां विपक्ष को घाटा हुआ है और तथाकथित सेकुलर पार्टियों का सत्ता हासिल करने का इरादा नाकाम हुआ है। बिहार इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

गौरतलब है कि बिहार में विधानसभा चुनावों के बाद आए नतीजों ने विपक्ष को डरा दिया है। ओवैसी की पार्टी ने सीमांचल क्षेत्र में 5 सीटें जीतकर महांगठबंधन की पार हो रही नैया को मझधार में ढकेल दिया है। इसके चलते आरजेडी से लेकर कांग्रेस सभी बीजेपी का एजेंट बताकर ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को कोस रहे हैं। भले ही सीमांचल की 5 सीटों पर ओवैसी ने जीत हासिल की हो लेकिन उन्होनें बीजेपी के लिए बिहार विधानसभा का मैदान खाली कर दिया।

ओवैसी के आने का असर ये हुआ कि एमवाई समीकरण वाली आरजेडी और कांग्रेस गठबंधन को नुकसान हुआ, और इसके चलते मुस्लिम वोट बंट गए। मुस्लिम वोटों के बंटने की स्थिति ये हुई कि बीजेपी को तगड़ा फायदा हुआ। इसके चलते आरजेडी-कांग्रेस के महागठबंधन की सरकार बनते-बनते रह गई। विशेषज्ञों का कहना तो ये भी है कि ओवैसी के जीतने के कारण ही एनडीए गठबंधन की सरकार बिहार में बन रही है।

बिहार चुनाव में ओवैसी के कारण पहले ही कांग्रेस समेत कई विपक्षी नेता भड़क गए हैं और वो अब ओवैसी पर हमला बोल रहे हैं। ऐसे में विपक्षी के हमलों के बीच अब ओवैसी ने बंगाल चुनाव में लड़ने का एलान करके उन्हें एक और झटका दे दिया है। बंगाल में दर्जनों ऐसी सीटें हैं, जहां मुस्लिम वोट ही विजेता तय करते हैं। ऐसे में ओवैसी का बंगाल जाना ममता और कांग्रेस के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है। इससे मुस्लिम वोटरों के सामने एक बार फिर असमंजसस की स्थिति होगी जिसका सीधा फायदा बीजेपी को होगा।

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